मणिपुर में सरकार बनने के तौर तरीके से बढ़ी नाराजगी
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटीः मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में नेमचा किपगेन और लोसी दिखो के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के विरोध में ताजा हिंसा भड़क उठी है। गुरुवार को भड़की इस हिंसा में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच तीखी झड़पें हुईं। यह विरोध प्रदर्शन विशेष रूप से भाजपा नीत सरकार में कांगपोकपी से विधायक नेमचा किपगेन को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के खिलाफ था।
प्रदर्शनकारी तुइबोंग बाजार के पास एकत्र हुए और उन्होंने टायरों सहित पुराने कबाड़ के ढेर में आग लगा दी। इस दौरान भीड़ ने किपगेन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्थिति तब और बिगड़ गई जब तैनात सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों की संख्या सुरक्षा कर्मियों से कहीं अधिक थी, जिन्होंने बलों पर पथराव शुरू कर दिया। जवाब में सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया, जिसमें दो लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं। पुलिस के अनुसार स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है और अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं।
कुकी बहुल चुराचांदपुर जिले में कई समूहों ने शुक्रवार को पूर्ण बंद का आह्वान किया है। गौरतलब है कि बुधवार को भाजपा के युमनाम खेमचंद सिंह ने मणिपुर की बहाल एनडीए सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके साथ कुकी विधायक नेमचा किपगेन और नागा विधायक लोसी दिखो को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। इसे मेइती-कुकी संघर्ष से जूझ रहे इस बहु-जातीय राज्य में शासन साझा करने के एक नए प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है। किपगेन ने नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से वर्चुअली शपथ ली थी।
मणिपुर में 3 मई, 2023 से मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है। यह हिंसा तब शुरू हुई थी जब मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च निकाला गया था। तब से अब तक इस हिंसा में दोनों समुदायों के सदस्यों और सुरक्षा कर्मियों सहित कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग बेघर हो गए हैं। अशांति के कारण पिछले साल फरवरी में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, जिसे बुधवार को मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण से कुछ घंटे पहले ही हटाया गया है।