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Congress vs BJP: कांग्रेस के ‘टैलेंट हंट’ पर बीजेपी का तंज, कहा- योग्यता के आधार पर राहुल गांधी नहीं बनते नेता

भोपाल: सत्ता पक्ष के खिलाफ बयानों को धारदार बनाने अब प्रदेश कांग्रेस काबिल प्रवक्ताओं की खोज करने जा रही है. इसके लिए कांग्रेस 5 फरवरी से टैलेंट हंट और इंटरव्यू शुरू करने जा रही है. इसके पहले कांग्रेस ने 9 माह पहले खड़ी की गई प्रवक्ताओं की टीम को भंग कर दिया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि पार्टी में जो जिस काबिल होगा, उसे वह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. पार्टी ब्लॉक अध्यक्षों की भी बैठक बुलाने जा रही है. उधर मंत्री विश्वास सारंग ने बयान दिया है कि यदि कांग्रेस योग्यता और टैलेंट कांग्रेस की डिक्शनरी में नहीं है. यदि योग्यता के आधार पर नेता बनते होते तो राहुल गांधी, प्रियंका गांधी नेता बनते ही नहीं.

पुराने प्रवक्ताओं का भी होगा इंटरव्यू

कांग्रेस धारदार प्रवक्ताओं की फौज खड़ी करने के लिए दो दिन टैलेंट हंट चलाएगी. इसमें प्रदेश भर से कार्यकर्ताओं को भोपाल बुलाया जा रहा है. इसमें प्रवक्ता पद के लिए पार्टी कार्यकर्ता अपने आप को साबित करने के लिए मौजूदा मुद्दों पर अपनी समझ पेश करेंगे. इसमें राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय ज्वलंत मुद्दों को कार्यकर्ताओं के सामने रखा जाएगा. टैलेंट हंट के बाद इंटरव्यू भी होंगे. पूर्व प्रवक्ताओं को भी इस अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा.

टैलेंट हंट में चुने जाने के बाद ही प्रदेश स्तरीय और जिला स्तरीय प्रवक्ताओं की सूची जारी की जाएगी. पार्टी इस टैलेंट हंट के माध्यम से नए और काबिल चेहरों को मौका देना चाहती है.

मजबूती के लिए किया जा रहा बदलाव

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के मुताबिक “हम संगठन की मजबूती के लिए लगातार काम कर रहे हैं. इसके लिए 8 और 9 फरवरी को भोपाल और इंदौर संभाग के ब्लॉक अध्यक्षों की भी बैठक बुलाई गई है. पार्टी ने तय किया है कि जो अच्छा काम करेगा, उसे और अच्छी जिम्मेदारी दी जाएगी. जो जिस लायक होगा, उसे उसी हिसाब से जिम्मेदारी मिलेगी. पार्टी में सभी के लिए काम है. संगठन स्तर पर परिवर्तन सकारात्मकता के लिए किया जा रहा है.”

बीजेपी ने साधा कांग्रेस पर निशाना

उधर कांग्रेस में टैलेंट हंट से प्रवक्ताओं की नियुक्ति को लेकर मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर निशाना साधा है. मंत्री विश्वास सारंग ने आरोप लगाया कि “कांग्रेस में लोकतांत्रिक व्यवस्था ही है नहीं. अपने-अपने गुर्गों को पद देना, यह कांग्रेस की परंपरा है. कांग्रेस की कार्यकारिणी में जिनके नाम हैं, उनको एक साथ खड़ा ही नहीं किया जा सकता.

यदि योग्यता के हिसाब से नेता चुने जाते तो राहुल गांधी पार्टी में नहीं होते. योग्यता के आधार पर नेता बनते तो इंदिरा, राजीव गांधी और प्रियंका गांधी पार्टी में नहीं आती. यह सिर्फ गुटबाजी, गिरोहबाजी और परिवारवाद ही कांग्रेस की योग्यता है.”