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ईरान में मोसाद के कथित एजेंट को फांसी

इजरायल के साथ युद्ध समाप्त होने के बाद किलेबंदी जारी

तेहरानः ईरान ने एक बार फिर इजरायल के साथ चल रहे अपने पुराने और भीषण संघर्ष को उजागर करते हुए एक कथित मोसाद एजेंट को मौत की सजा दी है। ईरानी राज्य मीडिया और न्यायपालिका के आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह फांसी देश के दक्षिण-पूर्वी प्रांत सिस्तान-बलूचिस्तान की एक केंद्रीय जेल में दी गई।

दोषी ठहराए गए व्यक्ति पर इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए सक्रिय रूप से काम करने का गंभीर आरोप था। अभियोजन पक्ष का दावा है कि इस व्यक्ति ने न केवल ईरान के संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों की तस्वीरें और महत्वपूर्ण नक्शे इजरायल को सौंपे, बल्कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिकों की व्यक्तिगत जानकारी और उनकी गतिविधियों का विवरण भी साझा किया था। ईरान के लिए यह सुरक्षा में एक बड़ी सेंध मानी जा रही है, क्योंकि हाल के वर्षों में उसके कई परमाणु वैज्ञानिकों की रहस्यमय ढंग से हत्या हुई है।

यह घटनाक्रम ईरान और इजरायल के बीच चल रहे शैडो वॉर के एक नए अध्याय को दर्शाता है। दोनों देश दशकों से एक-दूसरे के खिलाफ प्रत्यक्ष युद्ध के बजाय साइबर हमलों, जासूसी और लक्षित हत्याओं के जरिए गुप्त युद्ध लड़ रहे हैं। ईरान का आरोप है कि उसके बुनियादी ढांचे पर होने वाले हालिया साइबर हमले और रक्षा ठिकानों पर हुए रहस्यमय विस्फोट इजरायल की सोची-समझी साजिश का हिस्सा हैं। यह फांसी ऐसे समय में दी गई है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय बातचीत पूरी तरह रुकी हुई है और ईरान पर प्रतिबंधों का दबाव बढ़ता जा रहा है।

इस फांसी ने मध्य-पूर्व में पहले से ही नाजुक भू-राजनीतिक स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल, ने इस सजा की कड़ी निंदा की है। उनका तर्क है कि ईरान में जासूसी के मामलों में दी जाने वाली न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं होती है। आरोप है कि कई बार राजनीतिक दबाव में या राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर बिना पर्याप्त सबूतों के ऐसे फैसले लिए जाते हैं।

दूसरी ओर, इजरायल ने अपनी पुरानी नीति को कायम रखते हुए इन आरोपों पर न तो कोई पुष्टि की है और न ही खंडन किया है। हालांकि, इजरायली अधिकारी अक्सर यह स्पष्ट करते रहे हैं कि वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। इस फांसी के तुरंत बाद, ईरान ने अपनी सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी है और आंतरिक निगरानी को सख्त कर दिया है। इससे पड़ोसी देशों में भी चिंता का माहौल है कि कहीं यह खुफिया युद्ध एक बड़े क्षेत्रीय सैन्य संघर्ष में न तब्दील हो जाए।