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सऊदी अरब के रेगिस्तान में दुर्लभ बर्फबारी

जलवायु परिवर्तन का अजीब नजारा इस साल भी दिखा

तबुकः सऊदी अरब के रेगिस्तानी इलाकों से आ रही बर्फबारी की तस्वीरें दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। दिसंबर 2025 के इस सप्ताह में हुई यह घटना न केवल अद्भुत है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है। सऊदी अरब का उत्तरी हिस्सा, विशेषकर तबुक क्षेत्र का जबल अल-लॉज पर्वत, बुधवार और गुरुवार को पूरी तरह से बर्फ की सफेद चादर में लिपटा नजर आया।

यह क्षेत्र समुद्र तल से लगभग 2,580 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ का तापमान गिरकर -4 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया, जिसके साथ ही धूल भरी आंधी और घने कोहरे ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया। स्थानीय लोगों के लिए यह नजारा किसी सपने जैसा था, जहाँ ऊंट बर्फ के बीच चलते हुए दिखाई दिए।

जलवायु परिवर्तन और वैज्ञानिक कारण मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दुर्लभ बर्फबारी के पीछे मुख्य कारण अरब सागर के ऊपर बना एक कम दबाव का क्षेत्र है। यह सिस्टम अपने साथ नमी लेकर आया जो उत्तर से आने वाली ध्रुवीय हवाओं से टकरा गई। जब आर्द्रता और शून्य से नीचे का तापमान एक साथ मिले, तो रेगिस्तान की रेत पर बर्फ गिरने लगी।

हालांकि सऊदी अरब के उत्तरी हिस्सों में सर्दियों में हल्की बर्फबारी पहले भी देखी गई है, लेकिन इसकी तीव्रता और व्यापकता ने विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है। इसे वैश्विक जलवायु परिवर्तन के एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ शुष्क क्षेत्रों में मौसम के चरम बदलाव आम होते जा रहे हैं। इस विंटर वंडरलैंड को देखने के लिए सऊदी अरब और खाड़ी देशों के अन्य हिस्सों से बड़ी संख्या में पर्यटक उमड़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग इन तस्वीरों को साझा कर रहे हैं और कई लोग तो इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा बनाई गई तस्वीरें मान रहे थे।

हालाँकि, इस रोमांच के साथ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। सऊदी सरकार और राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने यात्रियों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। यहाँ की बुनियादी संरचना और सड़कें बर्फबारी या भारी ओलावृष्टि के लिए नहीं बनी हैं, जिससे फिसलन और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा, अचानक हुई इस ठंड और बारिश से कई पहाड़ी क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात भी पैदा हुए हैं। यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रकृति का संतुलन बदल रहा है और भविष्य में ऐसे अप्रत्याशित मौसम के लिए तैयार रहना अनिवार्य होगा।