Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Gwalior Crime News: हस्तिनापुर में नवविवाहित जोड़े ने की आत्महत्या; एक ही फंदे पर लटके मिले पति-पत्न... Women's T20 World Cup 2026: पाकिस्तान महिला टीम की शर्मनाक हरकत; अहम मुकाबले से पहले कोच वहाब रियाज ... Anubhav Sinha & Taapsee Pannu: तापसी पन्नू के साथ अनुभव सिन्हा की ब्लॉकबस्टर जोड़ी; जानें निर्देशक क... US-Iran Peace Talks: स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच ट्रंप के बयान से बवाल; ईरानी प्रतिन... Rupee vs Dollar: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 15 पैसे लुढ़का; जानें क्या है बाजार का ताजा हाल Zoho in China: चीन में जोहो की 25 साल की लंबी यात्रा; श्रीधर वेम्बू की कंपनी का वहां कैसे बढ़ा दबदबा? Ardra Nakshatra 2026: सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश; मानसून की आहट और कृषि परंपराओं में इसका म... Mango Sandesh Sandwich Recipe: आम के सीजन में घर पर बनाएं क्रीमी बंगाली मैंगो संदेश सैंडविच, जानें आ... Maharashtra MLC Election Results: महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में 'महायुति' का दबदबा; 17 में से 16 ... Prayagraj Rape Case: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में पुलिस का बड़ा एक्शन; विधायक की फटकार के बाद आरोपी ...

ओमान के साथ व्यापार समझौता ऊर्जा सुरक्षा पर नजर

ईरान और होर्मुज संकट से उबरने की नई रणनीति पर काम

  • तेल लाने का दूसरा जलमार्ग तय किया

  • व्यापार समझौता पहले ही संपन्न हो गया

  • ओमान के बंदरगाह अब भी खुले हुए हैं

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः मध्य पूर्व में पिछले तीन महीनों से जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के समक्ष गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारे, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार बने तनाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। इस अनिश्चितता भरे माहौल के बीच, भारत ने कूटनीतिक सूझबूझ का परिचय देते हुए एक वैकल्पिक प्लान बी तैयार किया है, जो ओमान के साथ हुए द्विपक्षीय संबंधों के रूप में सामने आया है। 1 जून से प्रभावी हुआ भारत और ओमान के बीच का व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के विश्लेषण के अनुसार, यद्यपि आर्थिक दृष्टि से ओमान का बाजार अन्य खाड़ी देशों की तुलना में छोटा है और इससे मिलने वाले तात्कालिक व्यापारिक लाभ सीमित प्रतीत हो सकते हैं, लेकिन रणनीतिक दृष्टिकोण से यह समझौता भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस समझौते का मूल आधार ओमान की भौगोलिक विशिष्टता है। खाड़ी क्षेत्र के अधिकांश देश अपनी समुद्री पहुँच और ऊर्जा निर्यात के लिए पूरी तरह से हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं, जो वर्तमान में संघर्षों का केंद्र बना हुआ है। इसके विपरीत, ओमान का एक विशाल और महत्वपूर्ण तट अरब सागर और ओमान की खाड़ी के साथ सीधा जुड़ा हुआ है।

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, ओमान के प्रमुख बंदरगाह, जैसे कि सलालाह और दुकम, अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य के भीतर नहीं आते। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि किसी भी कारण से हॉर्मुज मार्ग बाधित होता है, तब भी ये बंदरगाह पूरी तरह से सुरक्षित और चालू रहेंगे। अतः, ओमान भारत के लिए एक भरोसेमंद व्यापारिक और ऊर्जा प्रवेश द्वार के रूप में कार्य कर सकता है।

यह समझौता केवल वाणिज्यिक आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित करने की एक सोची-समझी कूटनीतिक पहल है। किसी भी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष या भू-राजनीतिक अस्थिरता के समय, जब पारंपरिक समुद्री मार्ग अवरुद्ध हो सकते हैं, ओमान का यह मार्ग भारत को ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करेगा। संक्षेप में, भारत द्वारा ओमान के साथ किया गया यह समझौता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को अधिक लचीला, सुरक्षित और स्वायत्त बनाने की दिशा में एक साहसिक और दूरदर्शी कदम है।