Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
🚨 लातूर के औसा में स्कूल में वीडियो बनाने पर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पर FIR दर्ज लखनऊ KGMU में MBBS इंटर्न्स की भूख हड़ताल: ₹12,000 से बढ़ाकर ₹30,000 स्टाइपेंड करने की मांग, गेट पर ... बेंगलुरु के डोड्डाबल्लापुर में बड़ी कार्रवाई: पाकिस्तान स्थित गैंग से जुड़े 28 वर्षीय AC टेक्नीशियन ... बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक: वंदे मातरम् पर देशव्यापी अभियान का ऐलान, Gen Z से जुड़ेंगे ... जयपुर में जर्जर स्कूल पर एक्शन: पुराने भवन से 50 मीटर दूर ग्रामीण के मकान में शिफ्ट हुई कक्षाएं, 16 ... संभाजीनगर ट्रिपल डेथ केस: आईफोन की जिद या कोई और वजह? DCP रत्नाकर नवले बोले- जांच पूरी होने तक अफवाह... बिहार के DMCH में अमानवीयता की हद: गार्ड ने टूटे पैर वाले लावारिस मरीज को जमीन पर घसीटा, अधीक्षक ने ... 71 की उम्र में मेगास्टार चिरंजीवी का बॉक्स ऑफिस पर दबदबा, संक्रांति 2027 पर रिलीज होगी 'काका' पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद पर NIA का शिकंजा: लाहौर भेजा जाएगा समन, गैर-मौजूदगी में चलेगा ट... 'मर्द औरतों को कंट्रोल क्यों करना चाहते हैं?': राहुल गांधी ने पुणे में छात्राओं से किया सीधा संवाद, ...

प्रशांत क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन पर बैठक

वैश्विक जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक असर यहां

होनाइराः प्रशांत द्वीप राष्ट्रों के नेताओं ने फिजी में एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन के लिए मुलाकात की, जिसका मुख्य एजेंडा जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों से निपटना था। प्रशांत क्षेत्र के ये देश वैश्विक जलवायु संकट से सबसे अधिक प्रभावित होने वालों में से हैं, जहाँ समुद्र के बढ़ते स्तर और चरम मौसमी घटनाएं, जैसे कि अधिक शक्तिशाली चक्रवात और तटीय बाढ़, इन देशों के अस्तित्व के लिए सीधा खतरा पैदा कर रही हैं।

इस बैठक में, नेताओं ने एक संयुक्त क्षेत्रीय रणनीति विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया, जिसमें जलवायु लचीलापन बढ़ाने, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश करने और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर जलवायु न्याय की माँग करने पर जोर दिया गया। प्रशांत द्वीप समूह फोरम के तत्वावधान में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में, नेताओं ने अमीर और उच्च-उत्सर्जन वाले देशों से अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए तत्काल और अधिक महत्वाकांक्षी कार्रवाई करने का आह्वान किया।

एक प्रमुख चर्चा का विषय लॉस एंड डैमेज फंड था, जिसे पिछले सीओपी सम्मेलनों में स्थापित किया गया था। प्रशांत राष्ट्र इस बात पर जोर दे रहे हैं कि उन्हें उन नुकसानों की भरपाई के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए जो जलवायु परिवर्तन के कारण हुए हैं और जिन्हें अनुकूलन के माध्यम से टाला नहीं जा सकता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि विकसित देशों पर ऐतिहासिक रूप से उच्च उत्सर्जन के लिए अधिक जिम्मेदारी है।

इसके अलावा, बैठक में खाद्य सुरक्षा, समुद्री संसाधनों की सुरक्षा, और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया गया। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड, जो PIF के सदस्य हैं, ने भी प्रशांत क्षेत्र में जलवायु पहल का समर्थन करने के लिए अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को बढ़ाया। यह शिखर सम्मेलन इस बात पर प्रकाश डालता है कि इन छोटे द्वीप राष्ट्रों के लिए जलवायु परिवर्तन कोई दूर का खतरा नहीं है, बल्कि एक वर्तमान अस्तित्वगत संकट है जिसके लिए तत्काल और सामूहिक वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता है।