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अब आठ सौ पचास कामिकेज ड्रोन की खरीद

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ढील देने को तैयार नहीं

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: समकालीन वैश्विक संघर्षों, विशेषकर रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के तनावों ने यह सिद्ध कर दिया है कि भविष्य के युद्ध अब केवल टैंकों और मिसाइलों से नहीं, बल्कि उन्नत ड्रोन तकनीक से जीते जाएंगे। इसी रणनीतिक बदलाव को अपनाते हुए भारतीय सेना अपनी युद्धक क्षमताओं को एक नए युग में ले जाने के लिए तैयार है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, सेना ने 850 कामिकेज़ ड्रोन (जिन्हें सैन्य शब्दावली में लॉइटरिंग म्यूनिशन कहा जाता है) की तत्काल खरीद का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव रक्षा अधिग्रहण परिषद के पास अपने अंतिम चरण में है और इस महीने के अंत तक इसे हरी झंडी मिलने की प्रबल संभावना है।

कामिकेज़ शब्द का ऐतिहासिक संदर्भ आत्मघाती हमलों से है। तकनीकी रूप से, ये ड्रोन एक हवा में तैरते शिकारी की तरह होते हैं। ये मानवरहित विमान हवा में काफी समय तक मंडरा सकते हैं और दुश्मन के सटीक ठिकानों की तलाश कर सकते हैं। जैसे ही इन्हें अपना लक्ष्य मिलता है—चाहे वह दुश्मन का बंकर हो, रडार स्टेशन हो या सैनिकों की टुकड़ी—ये सीधे उससे जाकर टकरा जाते हैं और वहीं विस्फोट कर देते हैं। इनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये पूरी तरह से स्वदेशी होंगे और इन्हें फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के माध्यम से सेना में शामिल किया जाएगा, जिससे सेना की तात्कालिक जरूरतों को पूरा किया जा सके।

सेना केवल हथियार ही नहीं खरीद रही, बल्कि अपने सांगठनिक ढांचे में भी क्रांतिकारी बदलाव कर रही है। अब प्रत्येक इन्फैंट्री बटालियन के भीतर एक विशेष अश्नी प्लाटून का गठन किया जाएगा। इस प्लाटून का एकमात्र और मुख्य कार्य इन ड्रोनों का कुशलतापूर्वक संचालन करना होगा। सेना की दीर्घकालिक योजना आगामी कुछ वर्षों में ऐसे 30,000 ड्रोन सिस्टम अपनी विभिन्न थिएटर कमानों में शामिल करने की है। इससे भारतीय सेना को सीमावर्ती दुर्गम क्षेत्रों और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अभूतपूर्व बढ़त हासिल होगी।

ड्रोन तकनीक की ओर सेना का यह झुकाव अकारण नहीं है। हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर की अपार सफलता ने इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभाई है। पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी, के जवाब में भारतीय सेना ने सीमा पार पाकिस्तान स्थित आतंकी मुख्यालयों पर सटीक हमले करने के लिए इन मानवरहित प्रणालियों का व्यापक उपयोग किया था। ऑपरेशन के पहले ही दिन सात से अधिक आतंकी ठिकानों को सफलतापूर्वक ध्वस्त कर दिया गया था। उस अनुभव ने भारतीय रक्षा विशेषज्ञों को यह विश्वास दिलाया कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए ड्रोन तकनीक ही सबसे घातक और सटीक हथियार साबित होगी।