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बयान बदलने का दबाव बनाया गया: सौरभ भारद्वाज

ईडी की छापामारी के बारे में नई जानकारियां सामने आयी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली प्रदेश संयोजक, सौरभ भारद्वाज ने अपने आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई छापेमारी को पूरी तरह से मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में ईडी के दावों और आरोपों का एक-एक कर जवाब दिया। उनके घर पर मंगलवार की सुबह शुरू हुई यह छापेमारी लगभग 19 घंटे तक चली और बुधवार तड़के समाप्त हुई।

इस दौरान आप के कई नेता, विधायक, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग सौरभ के घर के बाहर डटे रहे और ईडी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ईडी टीम के जाने के बाद देर रात जब सौरभ घर से बाहर आए, तो उनका भव्य स्वागत किया गया।

सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि ईडी के अधिकारियों ने उन्हें फंसाने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें अपनी मर्जी से लिखे गए बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया और एक झूठा पंचनामा भी तैयार करने का प्रयास किया।

सौरभ ने आरोप लगाया कि एक ईडी अधिकारी ने उनके बयान को किसी तीसरे व्यक्ति के साथ साझा किया और फिर उन्हें अपने बयान के कुछ हिस्सों को हटाने के लिए दबाव डाला। जब उन्होंने इनकार कर दिया, तो अधिकारी एक नया बयान लेकर आए और कहा कि यह उनका ही बयान है, जिसमें से केवल कुछ बातें हटा दी गई हैं। सौरभ ने इस पर हस्ताक्षर करने से भी इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा कि कई घंटों की तलाशी के बाद भी ईडी को उनके घर से कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला, जिससे यह छापेमारी पूरी तरह से विफल साबित हुई। सौरभ ने बताया कि पंचनामे में ईडी ने केवल दो सार्वजनिक दस्तावेजों की बरामदगी दिखाई है, जिनमें चुनाव आयोग को दिया गया हलफनामा और दिल्ली हाईकोर्ट में दिया गया स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी का हलफनामा शामिल है।

सौरभ भारद्वाज ने अपने बयान की सत्यता साबित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। उन्होंने कहा कि उनका बयान दर्ज करने वाले ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर मयंक अरोड़ा के लैपटॉप और उनके खुद के प्रिंटर की फॉरेंसिक जांच कराई जाए, ताकि उनके मूल बयान की सच्चाई सामने आ सके। प्रेस वार्ता में अपना प्रिंटर दिखाते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी भी कागज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, सिवाय पहले पंचनामे के, जिसे बाद में ईडी अधिकारियों ने फाड़ दिया था।

सौरभ ने ईडी पर केंद्र सरकार के इशारे पर काम करने और राजनेताओं को फंसाने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि ईडी अधिकारियों के पास 43 सवाल थे, जिनका उन्होंने तसल्ली से जवाब दिया। उन्होंने अपने बयान में यह भी लिखवाया है कि यह पूरा मामला झूठा है और उन्हें दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना द्वारा एक आपराधिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।