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शांति के लिए संवाद और कूटनीति ही रास्ताः प्रधानमंत्री मोदी

कनाडा के प्रधानमंत्री से भेंट के बाद कहा, संकट पर भारत चिंतित

  • हैदराबाद हाउस में हुई दोनों की वार्ता

  • दो लोकतांत्रिक देशों की बात सशक्त

  • कनाडा की पिछली सरकार से अलग

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: मिडल ईस्ट में गहराते सैन्य संघर्ष और युद्ध के बिगुल के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर शांति का आह्वान किया है। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी विवाद का समाधान युद्ध से नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति के माध्यम से करने का पक्षधर है। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि जब भारत और कनाडा जैसे दो बड़े लोकतंत्र एक सुर में बात करते हैं, तो शांति की सामूहिक आवाज और अधिक सशक्त हो जाती है। उन्होंने कहा, पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति हमारे लिए गहरी चिंता का विषय है। भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती।

पधानमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि सरकार क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित देशों के साथ मिलकर काम कर रही है। वर्तमान में लाखों भारतीय पश्चिम एशिया में कार्यरत हैं, जिनकी सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के विरुद्ध बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा के बाद स्थिति विस्फोटक हो गई है। पिछले दो दिनों में सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और कई देश सीधे तौर पर इस युद्ध की आग में झुलस रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में भारत और कनाडा के बीच हुई यह वार्ता रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अपने मुंबई दौरे के बाद कनाडाई पीएम मार्क कार्नी रविवार शाम दिल्ली पहुंचे, जहाँ केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया। सोमवार को हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी और पीएम कार्नी के बीच न केवल कूटनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई, बल्कि दोनों नेताओं ने इंडिया-कनाडा सीईओ फोरम में भी शिरकत की। इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कनाडाई पीएम और वहां की विदेश मंत्री अनीता आनंद से मुलाकात की। जयशंकर ने दोनों देशों के रिश्तों को फॉरवर्ड-लुकिंग पार्टनरशिप (भविष्योन्मुखी साझेदारी) करार दिया। जानकारों का मानना है कि इस यात्रा से पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच रहे तनाव को कम करने और सहयोग के नए रास्ते खोलने में मदद मिलेगी।