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कनाडा के पीएम मार्क कार्नी की यात्रा से टूटेंगे गतिरोध

अमेरिकी राष्ट्रपति के तेवर से दोनों देश हुए हैं आहत

  • ट्रूडो के दौर में रिश्ता बिगड़ गया था

  • कई मुद्दों पर समझौते की तैयारी जारी

  • एफटीए पर भी शीघ्र ही वार्ता प्रारंभ होगी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की इस सप्ताह होने वाली भारत यात्रा द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक सुधार के रूप में देखी जा रही है। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक के अनुसार, इस यात्रा के दौरान परमाणु ऊर्जा, तेल और महत्वपूर्ण खनिजों सहित व्यापारिक अवसरों की एक नई लहर शुरू होगी। दोनों देशों के बीच अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में व्यापक समझौतों पर मुहर लग सकती है।

विशेष रूप से, इस यात्रा के दौरान भारत को कनाडा से यूरेनियम की आपूर्ति बढ़ाने के समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। भारत कनाडा से भारी कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों को खरीदने के लिए भी उत्सुक है। उच्चायुक्त पटनायक ने एक साक्षात्कार में कहा, हम स्कूल के बच्चे नहीं हैं जो एक ही मुद्दे—तुमने मेरा बैग ले लिया, तुमने मेरा लंच बॉक्स ले लिया—पर अटके रहें। आप आकार में सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और हम जनसंख्या में। हमारा साथ काम करना अनिवार्य और स्वाभाविक है।

यह यात्रा पिछले एक साल के तनावपूर्ण संबंधों में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। साल 2024 में, पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान संबंधों में भारी कड़वाहट आ गई थी, जब कनाडा ने छह भारतीय अधिकारियों को निष्कासित कर दिया था। हालांकि, मार्क कार्नी के सत्ता संभालने के बाद से परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। दोनों नेताओं ने नवंबर में मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी, जिसके अगले एक साल के भीतर संपन्न होने की संभावना है।

गुरुवार को भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह यात्रा भारत-कनाडा द्विपक्षीय संबंधों के सामान्यीकरण में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। दोनों देश अब एक-दूसरे की चिंताओं और संवेदनशीलता के प्रति आपसी सम्मान पर आधारित रचनात्मक और संतुलित साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और वैश्विक आर्थिक बदलावों ने भी दोनों देशों को नए व्यापारिक भागीदारों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।