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खारिज याचिकाएं भी दोबारा सूचीबद्ध होने की सूचना पर नाराज

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुधार की बात कही

  • पहली बार ऐसा मामला पकड़ में आया

  • जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई भी होगी

  • वर्ष 2022 में खारिज हो चुका था मामला

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में बड़े प्रशासनिक सुधारों का वादा किया है। यह कदम तब उठाया गया जब कोर्ट के संज्ञान में आया कि एक ऐसी याचिका, जिसे पहले ही तीन जजों की पीठ द्वारा खारिज किया जा चुका था, वह दोबारा एक अन्य बेंच के समक्ष सूचीबद्ध हो गई। मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जताते हुए घोषणा की कि वह रजिस्ट्री के उन अधिकारियों के खिलाफ गहरी प्रशासनिक जांच करेंगे, जो खुद को स्थायी समझते हैं और कामकाज में लापरवाही बरतते हैं।

सीजेआई सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि यह अधिनियम भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 111 के प्रावधानों के साथ असंगत है।

इस मामले की पृष्ठभूमि में, सिराज अहमद खान की एक याचिका पहले से ही न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ के समक्ष लंबित है। इसी आधार पर इरफान सोलंकी ने आग्रह किया कि उनकी याचिका को भी उसी लंबित मामले के साथ टैग (जोड़) दिया जाए।

हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को याद दिलाया कि ‘मोहम्मद अनस चौधरी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में इसी तरह की चुनौती को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 12 दिसंबर, 2022 को खारिज कर दिया था। उस समय कोर्ट ने अनुच्छेद 32 के तहत याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को सक्षम फोरम में जाने की स्वतंत्रता दी थी।

न्यायमूर्ति बागची ने इस दौरान सामान्य खंड अधिनियम के तहत प्रतिकूलता के तर्क पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या सामान्य कानूनों के आधार पर किसी राज्य के विशेष कानून को चुनौती दी जा सकती है? बावजूद इसके, सीजेआई की पीठ ने इस बात पर सख्त आपत्ति जताई कि खारिज हो चुकी याचिका दोबारा कैसे कोर्ट के सामने आ गई। यद्यपि वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने याचिका वापस लेने का आग्रह किया, लेकिन सीजेआई सूर्य कांत ने स्पष्ट किया कि मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाने के लिए याचिका को बोर्ड पर ही रखा जाएगा।