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वैष्णो देवी मार्ग पर अब तक 41 लोग मारे गये

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यात्रा जारी रखने पर सवाल उठाया

राष्ट्रीय खबर

श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर, विशेषकर जम्मू संभाग, में हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश ने एक और त्रासदी ला दी है। किश्तवाड़ में बादल फटने के बाद अब डोडा और वैष्णो देवी में हुए भूस्खलन ने कई परिवारों को शोक में डुबो दिया है। वैष्णो देवी के निकट भूस्खलन की घटना अत्यंत दुखद है, जहाँ पहले पाँच मौतों की खबर आई थी, लेकिन जैसे-जैसे मलबा हटाया गया, मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती गई।

अधिकारियों ने बताया कि अब तक इस घटना में 38 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 28 शव वैष्णो देवी के अर्द्धकुंवारी मार्ग से बरामद हुए हैं।
यह भूस्खलन इतना भीषण था कि कई तीर्थयात्री और स्थानीय लोग इसके मलबे में दब गए। मरने वालों में ज्यादातर लोग उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से थे, जिनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान शामिल हैं। यह घटना विशेष रूप से दुखद है क्योंकि ये सभी श्रद्धालु माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आए थे।

इस आपदा में 20 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा, डोडा जिले में भी भूस्खलन की एक अलग घटना में चार लोगों की मौत हुई है, जिससे कुल मरने वालों की संख्या 41 हो गई है।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिजन को नौ लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का एलान किया है। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने राज्य के उन 11 नागरिकों के लिए चार लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि की घोषणा की है, जिनकी मौत रियासी में हुए भूस्खलन में हुई है। सरकार का यह कदम पीड़ितों के परिवारों को इस मुश्किल घड़ी में कुछ राहत देने का प्रयास है।
इस आपदा के बाद से ही प्रशासन की तैयारियों और बचाव उपायों पर सवाल उठने लगे हैं। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब मौसम विभाग ने पहले ही खराब मौसम का अलर्ट जारी कर दिया था, तब जिला अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों को वैष्णो देवी मार्ग पर जाने से क्यों नहीं रोका?

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की त्रासदी से बचने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी और तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना चाहिए था। अब्दुल्ला ने इस मुद्दे पर भविष्य में विस्तृत चर्चा की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोका जा सके। इस तरह की प्राकृतिक आपदाएँ जम्मू-कश्मीर में लगातार सामने आ रही हैं, जिससे यहाँ की सुरक्षा और बचाव व्यवस्था की खामियाँ उजागर हो रही हैं।