Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
West Bengal News: बंगाल में 1 जून से महिलाओं को मिलेंगे ₹3000, शुभेंदु सरकार का 'अन्नपूर्णा भंडार' प... पीएम मोदी का वडोदरा से संबोधन: 'वर्क फ्रॉम होम' अपनाएं और सोने की खरीदारी टालें, जानें क्या है वजह Mira Bhayandar News: काशीमीरा में शिवाजी महाराज की प्रतिमा हटाने पर बवाल, सरनाईक और मेहता आमने-सामने BRICS Meeting Delhi: दिल्ली में जुटेगा BRICS, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर होगी चर्चा Rewa News: तिलक के दौरान दूल्हे के अफेयर का खुलासा, शादी से मना करने पर लड़की पक्ष को दौड़ा-दौड़कर प... Secunderabad News: बीटेक छात्र यवन की हत्या का खुलासा, लड़की के पिता-भाई समेत 10 आरोपी गिरफ्तार UP BJP Meeting Lucknow: 2027 चुनाव का रोडमैप तैयार करेगी BJP, लखनऊ में 98 जिलाध्यक्षों की बड़ी बैठक Katihar Crime News: कटिहार में मानवता शर्मसार, नाबालिगों को खूंटे से बांधकर पीटा, सिर मुंडवाकर जबरन ... Jamshedpur Triple Murder: जमशेदपुर में दिल दहला देने वाली वारदात, पिता ने पत्नी और दो बच्चों को उतार... मानव को अंगों को उगाने में मदद करेगा

अब प्रभु जगन्नाथ की शरण में निखरेगा नौकरशाही का ज्ञान

मोरहाबादी से धुर्वा की तरफ कूच करेगा स्किपा

  • क्यों पड़ी स्थानांतरण की जरूरत?

  • संस्थान का इतिहास काफी गौरवशाली

  • वर्तमान में यहां की पोस्टिंग शंटिंग है

राष्ट्रीय खबर

रांची: झारखंड के प्रशासनिक गलियारे से एक बड़ी खबर आ रही है। राज्य के भविष्य के नीति-निर्धारकों को तैयार करने वाला प्रतिष्ठित श्रीकृष्ण लोक प्रशासन संस्थान (स्किपा) अब अपना ठिकाना बदलने जा रहा है। जल्द ही यह संस्थान मोरहाबादी की हरियाली छोड़ धुर्वा के उस इलाके में स्थानांतरित हो जाएगा, जहाँ एक ओर लोकतंत्र का मंदिर (नया विधानसभा भवन) है, तो दूसरी ओर सदियों पुराना ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर। यानी अब प्रशिक्षु अधिकारी राजकाज की बारीकियों के साथ-साथ आध्यात्मिक शांति के बीच सुशासन का पाठ पढ़ेंगे।

दरअसल, 1952 में स्थापित यह संस्थान अब अपनी बढ़ती उपलब्धियों और प्रशिक्षुओं की संख्या के सामने छोटा पड़ने लगा है। वर्तमान में यहाँ 211 प्रशिक्षु अधिकारी प्रशिक्षण ले रहे हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी एक बड़ी बाधा बन गई है। संस्थान के पास ऐसा कोई बड़ा ऑडिटोरियम नहीं है जहाँ सभी 211 अधिकारियों को एक साथ बिठाया जा सके।

मजबूरी में एक ही लेक्चर को दो बार आयोजित करना पड़ता है। एक ही विषय पर दो बार व्याख्यान दिलवाने से सरकारी खजाने पर दोहरा बोझ पड़ता है। प्रति लेक्चर 5,000 रुपये की फीस के हिसाब से सरकार को 10,000 रुपये चुकाने पड़ते हैं। छात्रावास छोटा होने के कारण अधिकारियों को सर्ड में ठहराना पड़ रहा है। वहीं, दोपहर के भोजन (लंच) के समय डाइनिंग हॉल में होने वाली अफरा-तफरी व्यवस्था की पोल खोल देती है। मोरहाबादी की व्यस्त सड़कों से गुजरते वाहनों का शोर अक्सर क्लासरूम की एकाग्रता भंग कर देता है। धुर्वा के शांत परिवेश में यह समस्या दूर हो जाएगी।

बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के नाम पर बना यह संस्थान 1952 से ही प्रशासनिक दक्षता का केंद्र रहा है। यहाँ झारखंड प्रशासनिक सेवा और पुलिस सेवा के अधिकारियों को खास तौर पर सीएनटी और एसपीटी जैसे जटिल जमीनी कानूनों की ट्रेनिंग दी जाती है। हालांकि, प्रशासनिक हलकों में एक कड़वा सच यह भी है कि इस संस्थान में पदस्थापित होने वाले वरिष्ठ अधिकारी इसे शंटिंग पोस्ट (प्रभावहीन पद) मानते हैं। इसके बावजूद, संस्थान ने ई-गवर्नेंस और जनजातीय प्रशासन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

धुर्वा में शिफ्ट होने के बाद संस्थान को आधुनिक लाइब्रेरी, बड़े ऑडिटोरियम और विशाल छात्रावास की सुविधा मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा और सचिवालय के करीब होने से प्रशिक्षुओं को विधायी कार्यों को करीब से देखने का मौका मिलेगा। अब देखना यह है कि नए परिवेश में जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ झारखंड की नौकरशाही कितनी ऊर्जावान होकर निकलती है।