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राज्यसभा के बहस में विपक्ष के निशाने पर केंद्र सरकार

रेलवे के निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप

  • सत्ता पक्ष ने मोदी की सराहना की

  • टीएमसी ने कहा ममता मॉडल अपनाएं

  • वंदे भारत की तकनीक अन्य देशों को

नईदिल्लीः राज्य सभा में बुधवार विपक्ष ने सरकार पर रेलवे में सामान्य जन के हितों के बजाय निजीकरण, प्रीमियम रेलगाड़यिों के परिचालन को प्राथमिकता देने, दुर्घटनाएं रोकने में विफल रहने और विपक्षी पार्टियों की सरकारों वाले राज्यों के साथ रेल परियोजनाओं के मामले में सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया जबकि सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मोदी सरकार के कार्यकाल में रेलवे में तीव्रगति से हो रहे कार्यों की सराहना की।

रेल मंत्रालय के कार्यकरण पर चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस की सदस्य ने डोला सेन ने कहा कि भारत जैसे देश में गरीबों की जरूरत रेलवे की प्रथम प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा रेलवे का निजीकरण करना है और यही आज भारतीय रेल की समस्या बन गयी है।

उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाने की योजना भी निजीकरण से प्रेरित है पर इस कार्य में भी सरकार कुछ विशेष प्रगति नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि रेल परियोजनाओं के आवंटन और क्रियान्वयन में पश्चिम बंगाल के साथ भेदभाव किया गया। सुश्री सेन ने अपनी पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी के रेलवे मंत्री के कार्यकाल में की गयी पहलों और कार्यों को गिनाते हुए कहा रेलमंत्री अश्चिनी वैष्णव को रेलवे की परिचालन आय बढ़ाने के लिए सुश्री बनर्जी का मॉडल अपनाना चाहिए।

इससे पहले चर्चा की शुरुआत करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समिक भट्टाचार्य ने कहा कि 2012 में तत्कालीन रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी ने कहा था कि भारतीय रेल आईसीयू (गहन चिकित्सा कक्ष ) में है, और उसके तुरंत बाद उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। श्री भट्टाचार्य ने विपक्षी सदस्यों की टोका-टाकी के बीच कहा कि पश्चिम बंगाल के लिए रेल बजट में आवंटन तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की तुलना में तीन गुना हो चुका है, लेकिन राज्य सरकार के असहयोग के कारण 43 रेल प्ररियोजनाओं का काम प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि जमीन का अधिग्रहण राज्य सरकार को करना होता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में विभिन्न परियोजनाओं के लिए कुल मिला कर केवल 21 प्रतिशत जमीन ही अधिग्रहित की गयी है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण होने के कारण रेल लाइनों के दोहरीकरण और रेल सुविधाओं के विस्तार का काम भी कठिन तथा जोखिम भरा हो गया है। चर्चा में भाग लेते हुए द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सदस्य एनआर एलांगो ने तमिलनाडु में लंबित रेल परियोजनाओं को शीघ्रता से पूरा किए जाने की मांग की।

श्री एलांगो ने कहा कि तमिलनाडु के लोगों ने भाजपा को नहीं चुना तो इसके कारण उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है यह कहां तक ठीक कहा जाएगा। द्रमुक सदस्य ने आरोप लगाया कि सरकार चेन्नई स्थिति इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में विकसित वंदेभारत ट्रेन के विनिर्माण की तकनीकी जानाकरी इटली और रूस की कंपनियों को मुफ्त में दे रही है। उ

न्होंने के कहा कि वंदेभारत का एक रैक बनाने की आईसीएफ की लागत 70 करोड़ रुपये है जबकि विदेशी कंपनियों का प्रस्ताव 120 करोड़ रुपये का है। श्री एलांगो ने आरोप लगाया कि रेल मंत्रालय विदेशी कंपनियों को कोच विनिर्माण के लिए इस बात के आधार पर काम कर रहा है कि आईसीएफ में कर्मचारी कम हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि आईसीएफ में तकनीकी कर्मचारियों की संख्या बढ़ा कर उससे ही रैक बनवाना फायदेमंद होगा।