राष्ट्रपति के मनोनयन से ही साफ हो गयी थी तस्वीर
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राज्यसभा में पहले नामित हुए थे वह
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उपराष्ट्रपति ने कार्य का संचालन किया
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किसी और का नामांकन ही नहीं आया था
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: मनोनीत सदस्य हरिवंश को शुक्रवार को निर्विरोध राज्यसभा का उपसभापति चुन लिया गया है। संसदीय परंपराओं के अनुसार, उच्च सदन में उनकी सर्वसम्मति से नियुक्ति लोकतांत्रिक गरिमा को दर्शाती है। इससे पूर्व, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की सेवानिवृत्ति से रिक्त हुए पद पर हरिवंश को सदन के लिए मनोनीत किया था। हरिवंश का राज्यसभा सदस्य के रूप में दूसरा कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया था। उनके कार्यकाल की समाप्ति के साथ ही राज्यसभा के उपसभापति का पद रिक्त हो गया था, जिसके बाद सदन की कार्यवाही के सुचारू संचालन हेतु नए चुनाव की आवश्यकता थी।
राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने राज्यसभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 7 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए शुक्रवार, 17 अप्रैल, 2026 को चुनाव की तिथि निर्धारित की थी। निर्वाचन की प्रक्रिया के दौरान किसी अन्य प्रत्याशी द्वारा नामांकन न किए जाने के कारण हरिवंश को निर्विरोध इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद के लिए चुन लिया गया।
हरिवंश, जो अपने सौम्य व्यवहार और निष्पक्ष कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, अब पुनः उच्च सदन की कार्यवाही का संचालन करेंगे। उपसभापति के रूप में उनकी भूमिका सदन में विधायी कार्यों को व्यवस्थित करने, चर्चाओं का प्रबंधन करने और सभापति की अनुपस्थिति में सदन का नेतृत्व करने की होती है। उनके निर्विरोध निर्वाचन का सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों ने स्वागत किया है, जो सदन के भीतर उनके प्रति सम्मान और उनके पिछले कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों की स्वीकार्यता को प्रदर्शित करता है। यह नियुक्ति सदन की निरंतरता और विधायी स्थिरता को बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम है।