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परदेसी परदेशी जाना नहीं मुझे छोड़ के .. .. ..

 

बांग्लादेशी घुसपैठियों से झारखंड में सबकुछ गड़बड़ा गया है, भाजपा इसे ही चुनावी हथियार बनाकर आगे बढ़ रही है।

मतदान का पहला चरण बीत चुका है और दूसरे चरण की तैयारी में वह इलाका है, जिसके बारे में यह सब कुछ कहा जा रहा है। झारखंड के चुनाव में इसे कारपेट बॉम्बिंग कहते हैं यानी हर विधानसभा में लगातार हमला और वोट जुटाने की कवायद।

अब इस कोशिश का क्या नतीजा निकलता है, यह तो 23 तारीख को ही पता चल पायेगा। फिर भी आदिवासियों को अपने फोल्ड में लाने की कवायद जारी है।

दूसरी तरफ खतरा भांपते हुए हेमंत सोरेन ने पहले ही मईंया योजना का कार्ड जो खेल दिया था, उसमें महिलाएं मस्त हैं। एक पुरानी कहावत है, आपकी सब बात ठीक है लेकिन खूंटा यही गड़ेगा, वाली हालत हो गयी है। भाषणों में सब कुछ सही लगने के बाद भी जनसभा से लौटते वक्त महिलाओं को इस मईंया योजना की याद आ जाती है और नतीजा ठन ठन गोपाल।

जहां वोट पड़ चुके हैं, वहां से भी कुछ ऐसी ही सूचनाएं भाजपा को परेशान कर रही है क्योंकि थोक में वोट देने वाले इलाकों की महिलाओं को भी हेमंत की इस चाल ने दूसरी तरफ मतदान करने के लिए उकसा दिया और प्रत्याशी जोड़ घटाव में जुटे हुए हैं कि कहीं बाजी पलट ना जाए।

ईवीएम में जो कैद हो चुका है, उसके बारे में बार बार हिसाब किताब किया जा रहा है कि कैलकुलेशन में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हो गयी है। पार्टी के अपने लोगों की जानकारी तो दूसरे माध्यमों से जांचा परखा जा रहा है।

इसी बात पर फिल्म राजा हिंदुस्तानी का एक गीत याद आ रहा है। इस गीत को लिखा था नदीम श्रवण की जोड़ी ने और संगीत में ढाला था समीर ने। इसे कुमार सानू और अलका याग्निक ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल इस तरह हैं।

मैं ये नहीं कहती कि प्यार मत करना
किसी मुसाफिर का मगर ऐतबार मत करना

परदेसी परदेसी जाना नहीं परदेसी परदेसी जाना नहीं
मुझे छोड़ के मुझे छोड़ के
परदेसी परदेसी जाना नहीं
मुझे छोड़ के मुझे छोड़ के
परदेसी मेरे यारा वादा निभाना
मुझे याद रखना कहीं भूल ना जाना
परदेसी परदेसी जाना नहीं परदेसी परदेसी जाना नहीं
मुझे छोड़ के मुझे छोड़ के
परदेसी मेरे यारा वादा निभाना
तुम याद रखना कहीं भूल ना जाना
परदेसी परदेसी जाना नहीं
मुझे छोड़ के मुझे छोड़ के

 

मैंने तुमको चाहा तुमसे प्यार किया
सब कुछ तुम पे यार अपना वार दिया
मैंने तुमको चाहा तुमसे प्यार किया
सब कुछ तुम पे यार अपना वार दिया
बन गयी जोगन मैंने प्रीत का जोग लिया
ना सोचा ना समझा दिल का रोग लिया
परदेसी मेरे यारा लौट के आना
तुम याद रखना कहीं भूल ना जाना
परदेसी परदेसी जाना नहीं तू जाना नहीं
परदेसी परदेसी जाना नहीं रे जाना नहीं
मुझे छोड़ के मुझे छोड़ के मुझे छोड़ के मुझे छोड़ के
ल ना जाना भूल ना जाना भूल ना जाना
हर पल मेरी याद तुम्हें तड़पायेगी
में जागूँगा नींद तुम्हें ना आएगी

हर पल मेरी याद तुम्हें तड़पायेगी (तड़पायेगी)
में जागूँगा नींद तुम्हें ना आएगी
छोड़ के ऐसे हाल में जो तुम जाओगे (तुम जाओगे)
सच कहते हाँ हूँ जान बहुत पछताओगे
परदेसी मेरे यारा मुझे ना रुलाना
तुम याद रखना कहीं भूल ना जाना
परदेसी परदेसी जाना नहीं परदेसी परदेसी जाना नहीं
मुझे छोड़ के मुझे छोड़ के
परदेसी मेरे यारा वादा निभाना
मुझे याद रखना कहीं भूल ना जाना
परदेसी परदेसी जाना नहीं
मुझे छोड़ के मुझे छोड़ के परदेसी परदेसी जाना नहीं
मुझे छोड़ के मुझे छोड़ के परदेसी मेरे यारा वादा निभाना
परदेसी मेरे यारा लौट के आना मुझे याद रखना
कहीं भूल ना जाना ओ मेरे परदेसी जाना नहीं
मुझे छोड़ के मुझे छोड़ के
ओ मेरे परदेसी जाना नहीं मुझे छोड़ के मुझे छोड़ के

अब झारखंड छोड़कर महाराष्ट्र की तरफ चलते हैं तो वहां ओबीसी का मसला टेढ़ा फंस गया है। बेचारे मोदी जी को बार बार यह कहना पड़ रहा है कि मैं ओबीसी हूं इसलिए कांग्रेस की आंखों में खटकता हूं। ऊपर से एक हैं तो सेफ है का नारा भी देना पड़ गया है। लोकसभा चुनाव में इसी एक के अनेक होने की वजह से जो हाल हुआ था, उसे सभी जान रहे हैं। यूपी में भी हिंदू एकता का नारा काम नहीं कर पाया था और नतीजा सबके सामने है।दूसरी तरफ राहुल गांधी बार बार जातिगत जनगणना की बात कर कोशिशों पर पानी फेर रहे हैं। उसकी दलील है कि सरकार, मीडिया और कॉरपोरेट घराने में ओबीसी या आदिवासी की कितनी भागीदारी है, यह देश को जानना चाहिए। इसी वजह से अब हिंदू वोट को एकजुट करने की जरूरत है। कुल मिलाकर सारे दल जनता से यही कह रहे हैं कि मुझे छोड़कर मत चले जाना।