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जातिगत समीकरणों का भी हेमंत को नुकसान

चुनाव से ठीक पहले डीजीपी बदलने का फैसला भारी पड़ेगा


  • मध्य रात्रि में जारी हुआ आदेश

  • अगले चुनाव के वक्त क्या होगा

  • सुप्रीम कोर्ट की अवमानना भी हुई


राष्ट्रीय खबर

रांचीझारखंड विधानसभा चुनाव से कुछ ही माह पहले राज्य के डीजीपी को बदलना सरकार के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। याद दिला दें कि राज्यसभा हार्स ट्रेडिंग के मामले में चुनाव आयोग ने ही वर्तमान डीजीपी अनुराग गुप्ता को राज्य से बाहर भेजने का आदेश दिया था। जब कभी भी चुनाव आयोग किसी अधिकारी पर ऐसा फैसला लेता है तो हर बार चुनाव के वक्त ऐसे अफसरों को हटा दिया जाता है। झारखंड में कई अन्य अधिकारी भी हैं, जिनपर यह नियम लागू होता है।

1990 बैच के अधिकारी अनुराग गुप्ता को राज्य सरकार ने उस वक्त सस्पेंड कर दिया था। वे अपराध अनुसंधान विभाग के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) के पद पर तैनात थे। उनके खिलाफ राज्यसभा चुनाव-2016 में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट देने के लिए बड़कागांव की तत्कालीन कांग्रेस विधायक निर्मला देवी को लालच देने और उनके पति पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को धमकाने का आरोप है। गृह विभाग के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।

पद से हटाते हुए उन्हें पुलिस मुख्यालय में योगदान करने का आदेश जारी किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें सिर्फ जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। एडीजी अनुराग गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई से संबंधित फाइल मुख्यमंत्री को भेजी गई थी, जिसपर मुख्यमंत्री ने सहमति दे दी थी।

लोकसभा चुनाव के पूर्व एक अप्रैल को भारत निर्वाचन आयोग के आदेश पर राज्य से बाहर जाने का आदेश दिया गया था। उन्हें एडीजी विशेष शाखा के पद से भी हटा दिया गया था। लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने झारखंड में योगदान दिया। उसके बाद तत्कालीन सरकार ने उन्हें सीआइडी के एडीजी पद पर तैनात किया। अब फिर से चुनाव करीब आने के वक्त क्या होगा यह बड़ा सवाल है। वैसे भी डीजीपी को बदलने का मामला निश्चित तौर पर सुप्रीम कोर्ट में गया तो सरकार की फजीहत होगी। अदालत ने पहले ही यह आदेश दे रखा था कि इस फैसले का अनुपालन नहीं होने की स्थिति में उसे कभी भी अदालत की अवमानना माना जाएगा।

झारखंड सरकार द्वारा राज्य के डीजीपी अजय सिंह को भी उनके पद से हटा दिया गया और इनके स्थान पर तत्कालीन भाजपा के मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में विवादों में आए आइपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता को महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग, झारखण्ड, राँची (अतिरिक्त प्रभार-महानिदेशक, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, झारखण्ड, को राज्य के डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया।

अनुराग गुप्ता को डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार देने के बाद एकाएक राजनीतिक गलियारे से लेकर पुलिस महकमें में खलबली मच गई लेकिन यह निर्णय मध्य रात्रि को क्यों लिया गया यह भी जानना दिलचस्प होगा। जानकार मानते हैं कि हेमंत सोरेन सरकार का यह फैसला दलित वर्ग के वोटरों और नेताओं को नाराज करने वाला है। कुछ लोग मानते है कि काफी पहले से ही इसका माहौल बनाया जा रहा था। कुछ अज्ञात समीकरणों की वजह से पुलिस के कई महत्वपूर्ण विभाग भी अनुराग गुप्ता के पास ही रहेंगे जबकि आम तौर पर ऐसा होता नहीं है।