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ईरान-अमेरिका शांति समझौता में कूटनीतिक गतिरोध और अनिश्चितता

ईरान ने स्पष्ट किया अभी कोई संभावना नहीं

एजेंसियां

तेहरानःरविवार को ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी संभावित शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावनाओं को ईरानी अधिकारियों ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। पिछले कई दिनों से वैश्विक मीडिया में यह चर्चा जोरों पर थी कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता हो सकता है। हालांकि, ईरानी वार्ताकारों ने स्पष्ट किया है कि वे अपने पूर्व निर्धारित रुख पर पूरी तरह अडिग हैं और किसी भी प्रकार के दबाव में आकर समझौते की शर्तों को स्वीकार नहीं करेंगे।

इस कूटनीतिक गतिरोध का मुख्य कारण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और क्षेत्र में सैन्य प्रभाव को लेकर मतभेद हैं। ईरान का कहना है कि उसे शांति की चाह है, लेकिन यह उसकी संप्रभुता और परमाणु अधिकारों की कीमत पर नहीं हो सकती। दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष का मानना है कि ईरान के कार्यक्रम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति उस समय पैदा हुई जब दोनों पक्ष मध्यस्थता के लिए कतर या ओमान के प्रस्तावों पर विचार कर रहे थे, लेकिन अंतिम क्षणों में बातचीत बेनतीजा रही।

यह स्थिति न केवल मध्य-पूर्व की राजनीति को प्रभावित करती है, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग पर भी पड़ता है। अब देखना यह होगा कि क्या आने वाले हफ्तों में कोई नई बैक-चैनल वार्ता शुरू होती है या तनाव और अधिक गहराता है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है क्योंकि यह समझौता वैश्विक शांति के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा था। इस असफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दशकों पुराने इस विवाद को सुलझाना कितना जटिल कार्य है।