द्विपक्षीय और वैश्विक विषयों पर बैठक होगी
एजेंसियां
पेरिसः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फ्रांस में प्रस्तावित द्विपक्षीय मुलाकात वैश्विक कूटनीति के नजरिए से अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी परिणाम देने वाली मानी जा रही है। व्हाइट हाउस ने हाल ही में आधिकारिक पुष्टि की है कि जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर दोनों नेता एक विशेष द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
इस उच्च-स्तरीय वार्ता का मुख्य एजेंडा वैश्विक आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करना, महत्वपूर्ण रक्षा सौदों को अंतिम रूप देना और तेजी से बदलती उभरती हुई भू-राजनीतिक चुनौतियों पर आम सहमति बनाना होगा। यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के ऐसे नाजुक मोड़ पर हो रही है जब विभिन्न राष्ट्रों के बीच पुराने गठबंधनों का स्वरूप बदल रहा है और नई रणनीतिक धुरियां आकार ले रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक का केंद्र-बिंदु इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक विकास की रूपरेखा तैयार करना होगा। भारत के साथ अमेरिका के बढ़ते रक्षा संबंधों और आधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर होने वाली चर्चा दोनों देशों के बीच सामरिक विश्वास को और गहरा करेगी।
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का एक व्यापक उद्देश्य वैश्विक मंच पर भारत की एक प्रमुख शक्ति के रूप में भूमिका को मजबूती प्रदान करना और अंतरराष्ट्रीय निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में अपनी आवाज को प्रभावी बनाना है। दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप के लिए यह बैठक उनकी अमेरिका फर्स्ट नीति और भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी के बीच एक आवश्यक संतुलन बनाने का माध्यम होगी, जो आने वाले समय में दोनों देशों की नीतियों में स्पष्टता लाएगा।
दोनों नेताओं के बीच पुराना व्यक्तिगत तालमेल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। कूटनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि इस मुलाकात में जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे वैश्विक मुद्दों के अलावा, भविष्य की वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका पर विस्तृत विचार-विमर्श होगा। फ्रांस की मेजबानी में आयोजित हो रही यह बैठक दोनों लोकतांत्रिक शक्तियों के लिए अपने साझा हितों को साधने का एक सुनहरा अवसर है। इस मुलाकात के बाद एक व्यापक संयुक्त घोषणापत्र जारी होने की प्रबल संभावना है, जो न केवल अगले दशक के लिए दोनों देशों के संबंधों की रूपरेखा तय करेगा, बल्कि चीन और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों को एक कूटनीतिक संकेत भी देगा। वैश्विक निवेशकों की पैनी नजरें भी इस बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि इस दौरान लिए गए निर्णय अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुख और निवेश प्रवाह को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकते हैं।