Breaking News in Hindi

कई ड्रोनों को मार गिराने का भी दावा किया गया

होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेंटकॉम का सैन्य अभियान

वाशिंगटनः होर्मुज जलडमरूमध्य—जो वैश्विक तेल आपूर्ति ऋंखला की सबसे महत्वपूर्ण धमनी माना जाता है—एक बार फिर तीव्र सैन्य संघर्ष का केंद्र बन गया है। आज अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में पुष्टि की गई है कि खाड़ी के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गश्त कर रहे सैन्य बलों ने ईरान द्वारा संचालित कई मानव रहित विमानों (ड्रोन) को मार गिराया है। प्रारंभिक जांच और खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ये ड्रोन कथित तौर पर उस क्षेत्र से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मालवाहक जहाजों और टैंकरों को निशाना बनाने की फिराक में थे।

यह घटनाक्रम पिछले कई महीनों से क्षेत्र में जारी बढ़ते समुद्री तनाव की एक निरंतरता है, जो अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। रणनीतिक रूप से, होर्मुज जलडमरूमध्य न केवल अरब की खाड़ी के देशों के आर्थिक हितों के लिए अपितु पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए जीवन रेखा है। आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर खपत होने वाले कुल तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकीर्ण जलमार्ग से होकर गुजरता है।

यही कारण है कि इस क्षेत्र में होने वाली किसी भी छोटी सैन्य हलचल का सीधा, तात्कालिक और नकारात्मक प्रभाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों और वैश्विक मुद्रास्फीति पर पड़ता है। अमेरिकी नौसेना के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी खुले समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी तरह के अवैध हस्तक्षेप या समुद्री डकैती जैसे कृत्यों को रोकना है।

इस ताजा ड्रोन हमले ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा तैनाती और सतर्कता के स्तर को कई गुना बढ़ा दिया है। हालांकि, अधिकांश सैन्य विशेषज्ञों का यह मानना है कि इस प्रकार के ड्रोन हमलों का तात्कालिक उद्देश्य सीधे तौर पर पूर्ण युद्ध शुरू करना नहीं है, बल्कि इसके जरिए क्षेत्रीय प्रभाव और अपनी सैन्य क्षमता का दबदबा प्रदर्शित करना है।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत, किसी भी निर्दोष वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का घोर उल्लंघन और युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है। वर्तमान में, वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में इस बात पर बहस तेज हो गई है कि क्या अमेरिका इस मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के समक्ष ले जाएगा, या फिर इसे द्विपक्षीय तनाव के दायरे में ही नियंत्रित करने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल, क्षेत्र में तैनात सभी मित्र देशों के नौसैनिक बेड़ों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी संभावित अनहोनी या सैन्य दुस्साहस का प्रभावी ढंग से जवाब दिया जा सके।