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आईवीएफ क्लिनिक ने भ्रूण बदल दिये हैं

डीएनए की जांच से राज खुला तो भड़क गये हैं दंपति

  • दिल्ली के आईवीएफ क्लीनिक पर आरोप

  • पुलिस को एफआईआर करने का निर्देश

  • समानता नहीं दिखने पर संदेह हुआ था

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: दिल्ली के एक आईवीएफ क्लिनिक में कथित चिकित्सा लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गुरुग्राम के रहने वाले राहुल राठौर और उनकी पत्नी मीनू राठौर ने क्लिनिक पर उनके एम्ब्रियो (भ्रूण) को किसी अन्य जोड़े के एम्ब्रियो से बदल देने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में दिल्ली की एक अदालत ने स्थानीय पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं।

दंपति के अनुसार, उन्होंने बेहतर उपचार की उम्मीद में दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित एक प्रसिद्ध आईवीएफ केंद्र में अपना इलाज शुरू करवाया था। डॉक्टरों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि गर्भधारण के लिए उन्हीं के शुक्राणु और अंडे का उपयोग किया जाएगा। 14 मई 2025 को भ्रूण प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी हुई और 5 जनवरी 2026 को मीनू राठौर ने जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया।

हालांकि, समय बीतने के साथ दंपति को बच्चों के शारीरिक लक्षणों में अपने से कोई समानता नहीं दिखी, जिससे उन्हें संदेह हुआ। अनहोनी की आशंका के चलते उन्होंने डीएनए परीक्षण करवाया। दंपति का दावा है कि परीक्षण की रिपोर्ट ने उनके सबसे बुरे डर को सच साबित कर दिया—बच्चियां जैविक रूप से उनकी नहीं हैं।

इस घटना ने दंपति की खुशियों को सदमे में बदल दिया है। मीनू राठौर ने भावुक होते हुए कहा, हम अपने जैविक बच्चों की तलाश कर रहे हैं। जिस तरह हम अपने बच्चों के लिए तड़प रहे हैं, निश्चित रूप से वह दूसरी मां भी अपने बच्चों के लिए व्याकुल होगी जिनके पास हमारे बच्चे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बच्चियों को अपना न मान पाने के कारण वे उन्हें स्तनपान तक नहीं करा सकीं, फिर भी मानवता के नाते वे फिलहाल उनकी पूरी देखभाल कर रहे हैं।

राहुल राठौर ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने पुलिस और अदालत से आग्रह किया है कि क्लिनिक के आईवीएफ रिकॉर्ड्स, भ्रूण से संबंधित दस्तावेज, लैब डेटा और सीसीटीवी फुटेज को तत्काल प्रभाव से सुरक्षित किया जाए ताकि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न हो सके। साथ ही, उन्होंने कहा कि इस तरह की जालसाजी का शिकार कई अन्य देशों के जोड़े भी हुए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि क्लिनिक की कार्यप्रणाली में भारी खामियां हैं। यह मामला चिकित्सा जगत की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।