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कांकेर में 15.50 करोड़ की नहर लाइनिंग पहली ही बारिश में ढही! दुधावा डैम नहर टूटने से 35 एकड़ फसल जलमग्न

कांकेर (छत्तीसगढ़): उत्तर बस्तर के कांकेर जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से सभी प्रमुख नदी-नाले उफान पर हैं।

बारिश के कारण शहर सहित ग्रामीण इलाकों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही प्रशासनिक दावों और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की भी पोल खुलकर सामने आ रही है। जिले के शामतरा गांव में 15 करोड़ 50 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से हाल ही में बनकर तैयार हुई नहर लाइनिंग पहली ही तेज बारिश का दबाव नहीं झेल सकी और ताश के पत्तों की तरह ढह गई।

🌊 पहली ही बारिश में ढही दुधावा-सोनपुर नहर लाइनिंग, गुस्साए ग्रामीणों ने घटिया निर्माण पर उठाए सवाल

दरअसल, क्षेत्र के किसानों को सुचारू सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दुधावा डैम से सोनपुर तक इस नहर लाइनिंग का निर्माण कराया गया था।

लेकिन 15.50 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह नहर लाइनिंग पहली ही बारिश में शामतरा के पास टूटकर बह गई। नहर के टूटने से वहां एक बड़ा गड्ढा बन गया है, जहां से पानी लगातार तेज गति से बाहर बह रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने निर्माण कार्य के दौरान ही अधिकारियों से गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी शिकायतों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया, जिसका खामियाजा अब किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

🌾 35 एकड़ से ज्यादा फसल जलमग्न, 20 से अधिक किसानों की मेहनत पर फिरा पानी

नहर लाइनिंग के टूटने से किसानों की सिंचाई की बची-खुची उम्मीदें भी पूरी तरह टूट चुकी हैं।

नहर टूटने के कारण पानी का तेज बहाव पास के तालाब की मेड़ को तोड़ता हुआ सीधे किसानों के लहलहाते खेतों में जा घुसा। इस भीषण जलभराव के चलते 20 से अधिक किसानों की 30 से 35 एकड़ से ज्यादा फसलें पूरी तरह डूबकर बर्बाद हो गई हैं। विभागीय लापरवाही और घटिया निर्माण के कारण किसानों में भारी आक्रोश और निराशा का माहौल है।

🗣️ “लापरवाही से बनी नहर, शिकायत के बाद भी नहीं ध्यान दिया गया”: पीड़ित किसानों का छलका दर्द

स्थानीय किसान विष्णु प्रसाद सरोज ने अपना दुख व्यक्त करते हुए कहा, “वर्ष 2025 में ही यह नहर बनकर तैयार हुई है। अत्यधिक लापरवाही से काम कराए जाने की वजह से यह पहली ही बारिश में टूट गई। गांव वालों ने काम के दौरान समझाइश भी दी थी कि गुणवत्ता का ध्यान रखा जाए, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।”

वहीं ग्रामीण पन्नालाल प्रधान ने बताया, “विरोध करने पर भी ठेकेदार और अधिकारियों ने अपनी मनमानी की। अब करीब 40-45 एकड़ खेतों में पूरी तरह पानी भर गया है, जिससे हमारी फसलें तबाह हो गई हैं।”

🏗️ जल संसाधन विभाग की सफाई: भारतमाला प्रोजेक्ट के पानी के दबाव से टूटी नहर, ठेकेदार को हटाया गया

इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए जल संसाधन विभाग के अधिकारी ने कहा कि वर्तमान में दुधवा जलाशय (डैम) से केनाल में मुख्य पानी नहीं छोड़ा गया था।

अधिकारी का दावा है कि भारतमाला परियोजना के तहत आसपास किए गए निर्माण कार्यों से आए पानी के अत्यधिक दबाव के कारण यह नहर क्षतिग्रस्त हुई है। उन्होंने बताया कि पूर्व में जब निर्माण कार्य की शिकायत मिली थी, तब संबंधित ठेकेदार को काम से हटा दिया गया था।

📋 फसलों के नुकसान का मूल्यांकन कर शासन को भेजा जाएगा मुआवजा प्रस्ताव

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने प्रभावित किसानों को आश्वस्त किया है कि स्थिति का जायजा लिया जा रहा है।

अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि जिन भी किसानों की फसलों को जलभराव से नुकसान पहुंचा है, उसका त्वरित सर्वे और मूल्यांकन कराकर राहत राशि का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा ताकि किसानों को उचित मुआवजा मिल सके।