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संपादकीय

केरल से केरलम पर जनता को क्या मिलेगा

केंद्रीय मंत्रिमंडल के उन प्रतिष्ठित सभागारों में, जहाँ कोई यह कल्पना कर सकता है कि राष्ट्र के नीति-निर्धारक लड़खड़ाती वैश्विक अर्थव्यवस्था…
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चुनाव आयोग पर संस्थागत विश्वास का संकट

पिछले शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण  के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार और भारत निर्वाचन आयोग का…
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आयोजन और प्रदर्शन दोनों में संयम जरूरी था

जब कोई सरकार किसी वैश्विक तकनीकी शिखर सम्मेलन की मेजबानी करती है, तो वह एक मौन वादा करती है—कि वह अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को अपनी कार्यकुशलता…
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भारतीय किसानों की सरकारी उपेक्षा क्यों

गत शनिवार से भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा सामने आते ही देश में एक तीखी बहस छिड़ गई है। इस समझौते ने एक पुरानी और…
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संविधान का मूल दायित्व जनता के प्रति है

भारत का उच्चतम न्यायालय हाल के दिनों में दूसरी बार संवैधानिक प्रावधानों और उनके मूल उद्देश्यों के प्रति उदासीन दिखाई दिया है। शीर्ष अदालत का…
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श्रीलंका से भारत के लिए सबक

पड़ोसी देश श्रीलंका से हाल ही में आई एक खबर ने न केवल दक्षिण एशिया, बल्कि दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों का ध्यान खींचा है। श्रीलंका की संसद…
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सब कुछ सीखा हमने, न सीखी होशियारी

आजकल की राजनीति में विचारधाराएं बिल्कुल वैसे ही बदलती हैं जैसे किसी फिल्मी गाने में अचानक रीमिक्स आ जाता है। कल तक जो नेता एक-दूसरे को फूटी…
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तकनीक के शोर में नैतिकता की गूँज और धूमिल होती साख

भारत इन दिनों वैश्विक पटल पर एक टेक सुपरपावर के रूप में उभरने की आकांक्षा रखता है। इंडिया एआई समिट जैसे आयोजन इसी दिशा में एक साहसिक कदम…
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हिमंता की हिम्मत या अंदर का भय

असम में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। देश के पूर्वोत्तर का यह महत्वपूर्ण राज्य वर्तमान में सामाजिक और आर्थिक सूचकांकों के मामले में…
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राहुल का हमला और सतर्क भाजपा

एक स्वस्थ और क्रियाशील संसदीय लोकतंत्र की आधारशिला इस विचार पर टिकी होती है कि वैचारिक मतभेद होने के बावजूद राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी कभी…
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सरकार की सफाई के बाद भी भरोसा कम है

व्यावहारिकता यानी जो संभव है उसकी कला को स्वीकार कर लेना और परित्याग यानी अपने निर्णय, जवाबदेही या सिद्धांतों को छोड़ देना—के बीच की रेखा…
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अस्पष्ट व्यापार समझौता का परिणाण अनिश्चित

आशावाद के पीछे का धुंधलका भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच हाल ही में संपन्न हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सरकारी गलियारों और…
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पर्दे में रहने दो पर्दा न उठाओ.. .. ..

सत्ता के गलियारों में आजकल एक पुराना फिल्मी नगमा गूँज रहा है पर्दे में रहने दो, पर्दा न उठाओ। वैसे तो यह गाना 1968 की फिल्म शिखर का है, जहाँ…
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असली मुद्दों पर सफाई दे मोदी सरकार

भारतीय लोकतंत्र में सेना और सरकार के बीच का समन्वय देश की सुरक्षा की रीढ़ होता है। लेकिन जब देश के पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल एम.एम. नरवणे की…
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