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लिपुलेख दर्रे को खोलने की प्रशासनिक तैयारी

सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद फिर से खुलेगा व्यापार मार्ग

  • राजनयिक प्रयासों का परिणाम

  • प्रशासनिक तैयारियां और संचालन

  • स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा

राष्ट्रीय खबर

देहरादूनः उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित ऐतिहासिक लिपुलेख दर्रे के माध्यम से भारत और चीन के बीच सीमा पार व्यापार इस जून से पुन: शुरू होने जा रहा है। यह एक महत्वपूर्ण राजनयिक और आर्थिक घटनाक्रम है, क्योंकि कोविड-19 महामारी और सीमा पर उपजे तनाव के कारण वर्ष 2019 के बाद से यह व्यापारिक मार्ग पूरी तरह बंद था। सात साल के लंबे अंतराल के बाद इस मार्ग का खुलना हिमालयी क्षेत्र के स्थानीय व्यापारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

व्यापार बहाल करने का यह निर्णय अगस्त 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया है। इस वार्ता में दोनों देशों ने सामरिक महत्व के हिमालयी व्यापारिक मार्गों को फिर से खोलने पर सहमति व्यक्त की थी, जिसमें हिमाचल प्रदेश का शिपकी ला और सिक्किम का नाथू ला दर्रा भी शामिल है। विदेश मंत्रालय द्वारा औपचारिक अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी होने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भतगई ने पुष्टि की है कि जून से सितंबर (संभावित अक्टूबर तक) चलने वाले इस व्यापारिक सत्र के लिए स्थानीय स्तर पर बैठकें शुरू हो चुकी हैं। धारचूला के उप-जिलाधिकारी को मुख्य व्यापार अधिकारी नियुक्त किया गया है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन को इस संबंध में विस्तृत निर्देश भेजे हैं। गृह मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय ने भी इस प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है।

वर्ष 2020 से व्यापार बंद होने के कारण स्थानीय भोटिया जनजाति और सीमावर्ती व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। अब प्रशासन व्यापारियों के लिए ट्रांजिट कैंप, सुरक्षित संचार चैनल, मुद्रा विनिमय के लिए विशेष बैंकिंग सेवाएं और चिकित्सा सुविधाएं स्थापित करने की योजना बना रहा है। सीमा के दोनों ओर के अधिकारियों के बीच संपर्क विवरण साझा किए जा रहे हैं ताकि सुरक्षा और सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जा सके। यह कदम न केवल आर्थिक बल्कि द्विपक्षीय संबंधों में जमी बर्फ पिघलाने की दिशा में भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।