डीके शिवकुमार के आक्रामक तेवर से पीछे हटा चुनाव आयोग
कौन लोग थोक में फॉर्म भर रहे हैं
खास वर्ग को निशाना बनाया जा रहा
छपे हुए फॉर्म किसने बांटा है पता करो
राष्ट्रीय खबर
बेंगलुरुः मुख्यमंत्री के धरने के बाद कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने फर्जी मतदाता विलोपन आवेदनों पर कार्रवाई का निर्देश दिया है। कानूनी विभाग से परामर्श के बाद जारी किए गए इस निर्देश के पीछे मुख्यमंत्री शिवकुमार द्वारा मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनबुकुमार के कार्यालय के बाहर किया गया अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन था, जिसमें उन्होंने मतदाता सूचियों से पात्र मतदाताओं, विशेषकर अल्पसंख्यकों और दलितों के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 आवेदनों के कथित थोक रूप से जमा किए जाने पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। सीईओ ने कहा कि झूठे दावे या आपत्तियां करने वाले पाए गए आवेदकों के खिलाफ जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
सीईओ कार्यालय ने यह भी निर्देश दिया कि जिन मामलों में फॉर्म-7 आवेदन बड़ी संख्या में दाखिल किए गए हैं और जिनके फर्जी होने का संदेह है, वहां संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को कार्रवाई शुरू करने से पहले गहन जांच करनी चाहिए। मुख्यमंत्री शिवकुमार, आधा दर्जन से अधिक कैबिनेट सहयोगियों और कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के साथ, तब तक सीईओ कार्यालय से हटने से इनकार करते रहे जब तक कि कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं कर दी गई। इसके चलते दोपहर 3 बजे होने वाली कैबिनेट की बैठक भी रद्द करनी पड़ी।
शिवकुमार ने कहा कि सीईओ ने शुरू में जिला निर्वाचन अधिकारियों की रिपोर्ट की जांच के लिए दो दिन का समय मांगा था, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि कार्रवाई के लिए पहले ही पर्याप्त सबूत सौंपे जा चुके हैं। उन्होंने कहा, मैं अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटूंगा। हर मतदाता के अधिकारों की रक्षा करना मेरा परम कर्तव्य है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछले तीन दिनों में भाजपा और जद(एस) के नेताओं ने कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में 3,000 से 15,000 मतदाताओं को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 आवेदन जमा किए हैं। उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं के नाम, ईपीआईसी नंबर और बूथ विवरण वाले पहले से छपे फॉर्म पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच बांटे गए थे।
शिवकुमार ने बेलगावी की घटनाओं का हवाला दिया, जहां उन्होंने कहा कि कुछ बूथ-स्तरीय एजेंटों ने फॉर्म-7 आवेदन वापस ले लिए और माफी पत्र सौंपे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विजयपुरा में 13,000 मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाया गया। मुख्यमंत्री ने मांग की थी कि चुनाव आयोग सभी प्रभावित जिलों के डीईओ को इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दे। उन्होंने आरोप लगाया कि भारी संख्या में दिए गए ये आवेदन एसआईआर मसौदा मतदाता सूचियों के प्रकाशन के बाद अन्य 50 लाख मतदाताओं को हटाने के प्रयास का हिस्सा थे।
खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री रिजवान अरशद ने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 को बड़े पैमाने पर छापा गया और भाजपा तथा संघ परिवार के कार्यकर्ताओं में बांटा गया। हरिप्रसाद ने कहा कि मतदाता विवरण वाले पहले से छपे फॉर्म यह दर्शाते हैं कि आवेदन व्यवस्थित रूप से तैयार और वितरित किए गए थे। सीईओ के इस निर्देश के बाद तात्कालिक गतिरोध समाप्त हो गया, हालांकि शिवकुमार ने कहा कि यह लड़ाई जारी रहेगी और सरकार उन मतदाताओं की रक्षा के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएगी जिन्हें नोटिस मिले हैं।