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हर मोर्चे पर भाजपा सरकार विफल रही हैः राहुल गांधी

बैगा आदिवासी शोक संतप्त परिवारों से मिले नेता प्रतिपक्ष

बालाघाट के गांव तक पहुंचे थे वह

अनेक बच्चों की यहां मौत हुई है

हाईकोर्ट में भी पहुंचा है यह मामला

राष्ट्रीय खबर

भोपालः कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में पिछले कुछ महीनों में जान गंवाने वाले आदिवासी बच्चों के परिवारों से मुलाकात की और आरोप लगाया कि अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवाओं तथा कुपोषण पर उचित कार्रवाई न होने के कारण यह संकट पैदा हुआ है। महाराष्ट्र से यात्रा करके बिरसा विकास खंड के गांवों में पहुंचे राहुल गांधी ने बैगा आदिवासी परिवारों और बीमार बच्चों के परिजनों से मुलाकात की। इसके अलावा, उन्होंने माते गांव के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय का दौरा किया और वहां के छात्रों से उनकी पढ़ाई तथा मध्याह्न भोजन के बारे में बातचीत की।

जगला गांव में राहुल गांधी ने बच्चों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया और आरोप लगाया कि भाजपा नीत मध्य प्रदेश सरकार आदिवासी बहुल क्षेत्र में पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और रोजगार सहायता प्रदान करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि वह इस गंभीर मुद्दे को संसद में उठाएंगे। गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि मृत बच्चों के परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिला है और कुछ लोग अभी भी वित्तीय सहायता का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं, ग्रामीण रोजगार कार्यों को फिर से शुरू करने तथा पात्र आदिवासी परिवारों को भूमि अधिकार देने के लिए वन अधिकार अधिनियम को सख्ती से लागू करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि यदि मध्य प्रदेश में, जहां अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना है, कांग्रेस सत्ता में आती है तो पार्टी स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों का पूरा समर्थन करेगी। राहुल गांधी ने वनवासी शब्द के मुकाबले आदिवासी शब्द के इस्तेमाल पर एक बार फिर जोर देते हुए कहा कि आदिवासी समुदाय देश के मूल निवासी हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में इन प्रभावित क्षेत्रों में कम से कम 30 आदिवासी बच्चों की मौत की खबर सामने आई है। इन मौतों के पीछे खसरा, मलेरिया, श्वसन संबंधी बीमारियां, कुपोषण, डिहाइड्रेशन और एनीमिया जैसे कारण बताए जा रहे हैं। बिरसा और बैहर ब्लॉकों के दूरदराज के बैगा-बहुमंजिला गांवों में हुई इन बच्चों की मौतों ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी इस मामले में दायर याचिका पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।