गवर्नर शब्द की जगह प्रशासक शब्द प्रतिस्थापित
स्थानीय संगठनों की मांगों पर चुप्पी
स्वायत्तता देने का सवाल अनुत्तरित
दोनों संगठन इससे कतई खुश नहीं
राष्ट्रीय खबर
श्रीनगरः लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रख्यापित लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (संशोधन) विनियमन, 2026 को अधिसूचित किए जाने के साथ ही केंद्र शासित प्रदेश के सभी आठ पहाड़ी परिषदों के चुनावों का रास्ता साफ हो गया है और चुनाव कराने की शक्तियां राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप दी गई हैं।
हालांकि, महत्वपूर्ण रूप से, केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जारी और राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित एलएएचडीसी (संशोधन) विनियमन, 2026 में लद्दाख के लिए उपराज्यपाल के स्थान पर प्रशासक शब्द का इस्तेमाल किया गया है। एलएएचडीसी संशोधन विनियमन, 2026 में कहा गया है, एलएएचडीसी अधिनियम, 1997 में जहाँ कहीं भी गवर्नर (राज्यपाल) शब्द आता है, उसे प्रशासक (एडमिनिस्ट्रेटर) शब्द से प्रतिस्थापित किया जाएगा। प्रशासक का अर्थ संविधान के अनुच्छेद 239 के तहत राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का प्रशासक होगा।
इसमें कहा गया है कि राज्य निर्वाचन आयोग जिला परिषदों के निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण के साथ-साथ इस अधिनियम के तहत मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव संचालन से जुड़े सभी मामलों के लिए जिम्मेदार होगा। इसमें यह भी जोड़ा गया कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए नियुक्त SEC को ही राज्य निर्वाचन आयोग माना जाएगा।
अधिनियम के अनुसार, एसईसी परिषद के सदस्यों के चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने के लिए जिम्मेदार होगा। यह जम्मू-कश्मीर पंचायती राज अधिनियम, 1989 और जम्मू-कश्मीर नगर पालिका अधिनियम, 2000 के तहत तैयार की गई मतदाता सूची को ध्यान में रखेगा, जैसा कि लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश पर लागू होता है।
अधिनियम में कहा गया है कि परिषद के पास जिला स्तर पर पंचायत की सभी शक्तियां होंगी। जम्मू-कश्मीर पंचायती राज अधिनियम, 1989 में निहित किसी भी बात के बावजूद, परिषद को इस अधिनियम के तहत शक्तियों का प्रयोग करने और कार्यों का संपादन करने के लिए जिला स्तर पर पंचायत माना जाएगा।
परिषद की वित्तीय शक्तियों पर, संशोधन में कहा गया है कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का प्रशासन, प्रशासन द्वारा अनुमोदित बजटीय आवश्यकता के अनुसार परिषद निधि में जमा करने के लिए बजट के तहत परिषद को धनराशि आवंटित करेगा।
संशोधित अधिनियम में कहा गया है, परिषद के पास, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के प्रशासन के अनुमोदन से, इस अधिनियम और इसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अधीन, इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान के तहत उप-नियम बनाने की शक्ति होगी जो लागू होंगे।
इसमें कहा गया है कि जो भी भूमि किसी मौजूदा परिषद को हस्तांतरित की गई थी और जो उस परिषद क्षेत्र के भीतर स्थित है, वह उस क्षेत्र के लिए गठित परिषद को हस्तांतरित और निहित मानी जाएगी। इसमें आगे कहा गया है कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का प्रशासन किसी मौजूदा परिषद और नियत तारीख को या उसके बाद गठित परिषद के बीच सभी संपत्तियों और देनदारियों के बंटवारे का प्रावधान करेगा।
इसमें कहा गया है, प्रत्येक कर्मचारी, जो नियत दिन से ठीक पहले, किसी परिषद क्षेत्र के भीतर मौजूदा परिषद के मामलों के संबंध में सेवा कर रहा था, उस दिन से उसी नियम और शर्तों पर उस परिषद क्षेत्र के लिए गठित परिषद का कर्मचारी माना जाएगा।
आगे यह भी जोड़ा गया कि लद्दाख प्रशासन के वे सभी कर्मचारी, जिन्हें जिले में परिषद में स्थानांतरित किया जाता है, न्यायिक स्थापना के कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों को छोड़कर, ऐसे नियमों और शर्तों पर स्थानांतरित कर्मचारी माने जाएंगे जो प्रशासन द्वारा अधिसूचित किए जा सकते हैं।
जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है, प्रत्येक परिषद का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा और इसके सदस्यों की संख्या सात से कम और 24 से अधिक नहीं होगी। हालांकि, लद्दाख प्रशासन जिले में महिलाओं और अप्रतिनिधित्व वाले समुदायों में से परिषद के लिए अधिकतम चार व्यक्तियों को मनोनीत कर सकता है। इस प्रकार मनोनीत व्यक्तियों की संख्या परिषद के लिए निर्धारित सीटों की संख्या के छठे हिस्से से अधिक नहीं होगी।
इस बीच, लद्दाख के एलजी विनय कुमार सक्सेना ने कहा: मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत के राष्ट्रपति द्वारा लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (संशोधन) विनियमन, 2026 के प्रख्यापन पर, मैंने 19 अक्टूबर, 2026 से इस नियमन को अधिसूचित कर दिया है।
एक्स पर एक पोस्ट में, सक्सेना ने इस नियमन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करेगा, स्थानीय प्रतिनिधित्व को बढ़ाएगा और समावेशिता को बढ़ावा देगा।
यह घटनाक्रम लद्दाख प्रशासन द्वारा केंद्र शासित प्रदेश के जिला ढांचे के विस्तार के बाद हुआ है। एलजी ने 27 अप्रैल को पांच नए जिलों – शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास के निर्माण को मंजूरी दी थी, जिससे कुल संख्या दो से बढ़कर सात हो गई थी।
पांच जिलों का औपचारिक उद्घाटन 30 अप्रैल को किया गया था, जबकि 16 अक्टूबर को संकू को आठवें जिले के रूप में घोषित किया गया था। एलजी ने केंद्र शासित प्रदेश के सभी जिलों के लिए लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के गठन की भी घोषणा की थी।