जलधाराओँ का प्रवाह तेजी से बाधित हो रहा है
धरती को संतुलित रखने में जरूरी है
ग्लेशियरों के पिघलने से ऐसा हो रहा
साइंस एडवांसेज में प्रकाशित नया शोध
राष्ट्रीय खबर
रांचीः महासागरों के परिसंचरण अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन को लेकर चिंताजनक जलवायु अध्ययन के बारे में हाल ही में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका साइंस एडवांसेज में प्रकाशित एक नए और व्यापक जलवायु अध्ययन ने दुनिया भर के पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
इस शोध के अनुसार, अटलांटिक महासागर की मुख्य जलधारा प्रणाली, जिसे अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (एएमओसी) कहा जाता है, वैज्ञानिकों के पूर्व अनुमानों से कहीं अधिक तेजी से कमजोर हो रही है। यह विशाल महासागरीय कन्वेयर बेल्ट प्रणाली पृथ्वी की जलवायु को संतुलित रखने में केंद्रीय भूमिका निभाती है। यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से गर्म पानी को उत्तर की ओर उत्तरी अटलांटिक की तरफ ले जाती है और ठंडे पानी को दक्षिण की ओर वापस भेजती है।
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यह प्रक्रिया यूरोप और उत्तरी अमेरिका के मौसम को रहने योग्य और संतुलित बनाए रखने में मुख्य संवाहक है। हालांकि, वैश्विक तापमान में लगातार हो रही वृद्धि और ग्रीनलैंड के पिघलते ग्लेशियरों से महासागरों में आने वाले मीठे पानी के कारण इस प्रणाली का घनत्व संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे इसका प्रवाह बाधित हो रहा है।
नवीनतम जलवायु मॉडल और डेटा विश्लेषण बताते हैं कि यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इसी गति से जारी रहा, तो इस सदी के अंत तक एएमओसी की ताकत में 42 प्रतिशत से 58 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ सकती है। इस प्रणाली के और अधिक कमजोर होने या पूरी तरह ठप पड़ने से वैश्विक मौसम चक्र पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है।
इसके परिणामस्वरूप उत्तरी यूरोप में अचानक अत्यधिक ठंड बढ़ सकती है, उष्णकटिबंधीय मानसूनी वर्षा तंत्र पूरी तरह बदल सकता है, और उत्तरी अमेरिकी तटों पर समुद्र का जलस्तर तेजी से ऊपर उठ सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अध्ययन इस बात की चेतावनी देता है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल भविष्य का अनुमान नहीं, बल्कि पृथ्वी के जीवन-समर्थन तंत्र को सीधे प्रभावित करने वाली एक गंभीर वास्तविकता बन चुका है।
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