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पर्ल्स ग्रुप के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई

बाइस हजार करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गयी

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़ः प्रवर्तन निदेशालय ने चंडीगढ़ स्थित पर्ल्स ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 22,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की है। केंद्रीय एजेंसी ने हाल ही में पंजाब और दिल्ली में स्थित समूह की 126 अचल संपत्तियों को फ्रीज करने का आदेश जारी किया, जिनकी कीमत लगभग 5,046.91 करोड़ रुपये आंकी गई है।

इस ताजा कार्रवाई के साथ ही इस मामले में अब तक कुर्क की गई कुल संपत्ति का मूल्य 22,656.91 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें भारत और विदेशों में स्थित संपत्तियां शामिल हैं। ईडी के अधिकारियों ने इसे धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत एक ऐतिहासिक उपलब्धि और किसी एक मामले में की गई अब तक की सबसे बड़ी कुर्की बताया है।

यह मामला 48,000 करोड़ रुपये के कथित पोंजी घोटाले से जुड़ा है, जिसकी जांच ईडी ने 2016 में शुरू की थी। इस जांच का आधार 2014 में केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर दर्ज की गई एक प्राथमिकी है। यह प्राथमिकी पीएसीएल लिमिटेड, उसके प्रमोटर निर्मल सिंह भंगू और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की गई थी। गौरतलब है कि मुख्य आरोपी निर्मल सिंह भंगू की अगस्त 2024 में मृत्यु हो चुकी है। ईडी की जांच के अनुसार, पीएसीएल के आरोपियों ने कृषि भूमि की बिक्री और विकास के बहाने देश भर के लाखों निवेशकों से धोखाधड़ी करते हुए 60,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अवैध सामूहिक निवेश योजनाओं के माध्यम से जुटाई थी।

एजेंसी ने खुलासा किया कि निवेशकों को नकद भुगतान और किस्तों वाली योजनाओं के माध्यम से निवेश करने के लिए लुभाया गया था। इस प्रक्रिया में उनसे भ्रामक दस्तावेजों, पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य समझौतों पर हस्ताक्षर कराए गए। अधिकांश मामलों में निवेशकों को कभी जमीन का कब्जा नहीं दिया गया और लगभग 48,000 करोड़ रुपये की राशि आज भी बकाया है। ईडी अब तक इस मामले में पांच चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। यह कार्रवाई उन लाखों गरीब और मध्यम वर्गीय निवेशकों के लिए उम्मीद की एक किरण है जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई इस घोटाले में गंवा दी थी। प्रशासन अब इन कुर्क की गई संपत्तियों के माध्यम से निवेशकों का पैसा वापस दिलाने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।