वकीलों के संगठन ने एसआईआर विवाद पर नई पहल की
वकीलों ने निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया शुरू की
पांच सदस्यीय आयोग पूरी तरह स्वतंत्र होगा
आयोग ने गलत किया है या सही जांच होगी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, वकीलों के एक प्रमुख संगठन ने चुनाव आयोग द्वारा संचालित मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की निष्पक्ष जांच के लिए देश के सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के पूर्व न्यायाधीशों का एक उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र पैनल गठित किया है।
लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन (एलएएफसी) द्वारा जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह पांच सदस्यीय आयोग पूरी तरह से स्वायत्तता और स्वतंत्रता के साथ कार्य करेगा। इस आयोग की कमान देश के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व प्रतिष्ठित न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर के हाथों में सौंपी गई है, जो इस पूरी समीक्षा प्रक्रिया का नेतृत्व करेंगे।
इस नवगठित स्वतंत्र आयोग के गठन का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान की संवैधानिक और वैधानिक वैधता, इसके क्रियान्वयन की कार्यप्रणाली तथा संपूर्ण प्रक्रिया के भारतीय मतदाताओं पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों की गहन समीक्षा करना है।
एलएएफसी ने स्पष्ट किया है कि यह पैनल इस बात की बेहद बारीकी से जांच करेगा कि क्या इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रूप से बनाए रखे गए, या फिर किसी तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटि के कारण उनके नाम सूची से बाहर तो नहीं कर दिए गए। इसके साथ ही, यह भी परखा जाएगा कि क्या वास्तव में अपात्र प्रविष्टियों को ही नियमानुसार बाहर किया गया है या इसमें किसी प्रकार की अनियमितता बरती गई है।
न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर के अलावा इस प्रतिष्ठित पैनल में कई अन्य न्यायिक दिग्गज भी शामिल किए गए हैं। इस पांच सदस्यीय आयोग के अन्य सदस्यों में सुप्रीम कोर्ट के ही पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.के. पटनायक, जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायमूर्ति बदर दुर्रेज अहमद, तथा दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश रेखा शर्मा और पटना उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश अंजना प्रकाश शामिल हैं। इन सभी न्यायविदों का लंबा और बेदाग न्यायिक अनुभव इस आयोग के निष्कर्षों को एक मजबूत और अकाट्य आधार प्रदान करेगा।
इस व्यापक जांच प्रक्रिया को धरातल पर उतारने के लिए आयोग की एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत आयोग देश के विभिन्न हिस्सों में सार्वजनिक जनसुनवाई आयोजित करने की योजना बना रहा है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आयोग की पूर्ण और क्षेत्रीय बेंचे देश के अलग-अलग स्थानों का व्यक्तिगत दौरा करेंगी।
इस दौरान वे उन सभी प्रभावित नागरिकों, विभिन्न नागरिक समाज संगठनों और विषय-विशेषज्ञों के विचार, साक्ष्य और गवाहियां सीधे तौर पर दर्ज करेंगी, जिन्हें इस एसआईआर प्रक्रिया के कारण किसी प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ा है। एलएएफसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस आयोग द्वारा तैयार किए गए अंतिम निष्कर्षों और इसकी महत्वपूर्ण सिफारिशों की पूरी जिम्मेदारी इसी आयोग के पास होगी।
इस उच्चस्तरीय स्वतंत्र न्यायिक आयोग को अपनी विधिक कार्यवाहियों और रणनीतिक निर्णयों में किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिए देश के कई जाने-माने और वरिष्ठ अधिवक्ता स्वेच्छा से इसके साथ जुड़े हैं। संगठन ने जानकारी दी है कि कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, चंदर उदय सिंह, प्रशांतो चंद्र सेन, राजू रामचंद्रन, रेबेका मामेन जॉन, वारिशा फरासत और वृंदा ग्रोवर जैसे देश के दिग्गज और प्रख्यात वकील इस आयोग को अपनी बहुमूल्य और रणनीतिक कानूनी सलाह प्रदान करेंगे।
जानकारों का मानना है कि देश के चुनावी इतिहास में इस तरह का स्वतंत्र न्यायिक पैनल अपनी तरह का एक अनूठा कदम है, जो मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण जैसे संवेदनशील प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित करने में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।