विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दो राज्यों में कांग्रेसी फेरबदल
दोनों राज्यों में चुनाव करीब आ रहे हैं
आराधना मिश्र को यूपी की कमान
परगट सिंह पंजाब के मैदान में
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को पूरी तैयारी और मजबूती के साथ लड़ने के लिए अपने संगठनात्मक ढांचे में एक बहुत बड़ा और रणनीतिक फेरबदल किया है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा कदम उठाते हुए विधायक आराधना मिश्रा मोना को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनके साथ ही पार्टी ने युवा और प्रभावशाली मुस्लिम चेहरे के रूप में सांसद इमरान मसूद को उत्तर प्रदेश इकाई का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। पार्टी की ओर से यह घोषणा करते हुए स्पष्ट किया गया है कि ये सभी महत्वपूर्ण संगठनात्मक नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।
नव-नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ देश के वरिष्ठ राजनेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की सुपुत्री हैं। उन्होंने अजय राय का स्थान लिया है, जो अगस्त 2023 से उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में पार्टी की कमान संभाल रहे थे। अजय राय को पार्टी की रणनीति के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उनकी पारंपरिक और हाई-प्रोफाइल वाराणसी लोकसभा सीट से लगातार तीन आम चुनावों (2014, 2019 और 2024) में चुनावी मैदान में उतरना पड़ा था। सांगठनिक संतुलन बनाते हुए पार्टी ने एक अन्य बड़ा बदलाव करते हुए चौधरी वीरेंद्र सिंह को उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल का नया नेता नियुक्त किया है। उल्लेखनीय है कि इस सांगठनिक बदलाव से ठीक पहले तक स्वयं आराधना मिश्रा ही विधायक दल की नेता के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रही थीं। इसके अतिरिक्त, पार्टी ने उत्तर प्रदेश संगठन को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को प्रदेश इकाई का वरिष्ठ उपाध्यक्ष नियुक्त किया है।
इसी व्यापक संगठनात्मक बदलाव की श्रृंखला के तहत, कांग्रेस पार्टी ने पंजाब राज्य में भी एक बड़ा निर्णय लिया है। पार्टी ने भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और कद्दावर विधायक परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। पंजाब में यह नेतृत्व परिवर्तन अमरिंदर सिंह राजा वडिंग द्वारा अपना औपचारिक इस्तीफा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को सौंपे जाने के बाद किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परगट सिंह की यह नियुक्ति पंजाब कांग्रेस इकाई के भीतर पिछले कई महीनों से चल रही अंतर्कलह, आपसी खींचतान और गुटबाजी को शांत करने के उद्देश्य से की गई है।
विशेष तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वडिंग के बीच का आपसी गतिरोध पिछले दिनों सार्वजनिक मंचों पर खुलकर सामने आ गया था। इस आंतरिक उथल-पुथल और मतभेदों से पार पाने के लिए ही केंद्रीय नेतृत्व ने पिछले महीने भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का नया पार्टी प्रभारी नियुक्त किया था, और अब राजा वडिंग की जगह परगट सिंह को कमान सौंपना आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले असंतुष्ट नेताओं को साधने का एक बेहतरीन प्रयास माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि परगट सिंह की छवि पूरी तरह से साफ-सुथरी और गैर-विवादास्पद रही है, जिसके चलते वे पार्टी के सभी गुटों के बीच एक बेहद स्वीकार्य और सम्मानित नेता के रूप में उभरे हैं।