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यूसीसी अपनाने वाला देश का दूसरा राज्य बना गुजरात

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रस्ताव को अपनी मंजूरी प्रदान की

सबसे पहले उत्तराखंड में लागू हुआ

कई नियम सभी के लिए बराबर होंगे

कुछ आदिवासी समुदाय इससे बाहर रहेंगे

राष्ट्रीय खबर

अहमदाबादः भारतीय प्रशासनिक और विधायी इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाले घटनाक्रम के तहत, देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 को अपनी औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। राष्ट्रपति की इस महत्वपूर्ण मुहर के लगने के साथ ही, उत्तराखंड राज्य के बाद गुजरात स्वतंत्र भारत में यूसीसी कानून को अपने यहां लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है।

इस नए और व्यापक कानून के अस्तित्व में आने के बाद से राज्य में विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे बेहद संवेदनशील तथा व्यक्तिगत मामलों के लिए एक एकसमान और पारदर्शी कानूनी ढांचा तैयार हो चुका है, जो राज्य के सभी धर्मों और समुदायों के नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा।

हालांकि, इस नए कानून के दायरे को स्पष्ट करते हुए अधिनियम में यह विशेष प्रावधान भी जोड़ा गया है कि भारतीय संविधान के पांचवीं और छठी अनुसूची या अन्य प्रावधानों के तहत संरक्षित आदिवासी समुदायों तथा कुछ अन्य विशेष रूप से अधिसूचित समूहों को इस यूसीसी के अनिवार्य दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है, ताकि उनकी पारंपरिक संस्कृति और प्रथागत कानूनों की सुरक्षा की जा सके।

इस नए अधिनियम के क्रियान्वयन से जुड़े प्रमुख प्रावधानों के तहत राज्यभर में विवाह का पंजीकरण कराना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है। इसके नियमों के अनुसार, किसी भी विवाह के संपन्न होने के ठीक 60 दिनों के भीतर उसका आधिकारिक रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक होगा।

यदि कोई व्यक्ति इस तय सीमा के भीतर विवाह का पंजीकरण कराने में असफल रहता है, तो उस पर दस हजार रुपए तक के भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, इस नए सामाजिक ढांचे के तहत बहुविवाह की प्रथा पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिससे लैंगिक समानता और पारिवारिक न्याय को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही, संपत्ति के उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में सभी धर्मों के अंतर्गत पुत्र तथा पुत्रियों (बेटे और बेटियों) को संपत्ति में पूर्ण रूप से समान कानूनी अधिकार प्रदान किए गए हैं।

इस कानून का एक अन्य सबसे महत्वपूर्ण और चर्चा का केंद्र बना पहलू लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित है, जिसे पहली बार एक निश्चित विधिक और पारदर्शी दायरे के अंतर्गत लाया गया है। इस नए कानून के प्रावधानों के मुताबिक, लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को अपने इस प्रकार के संबंधों का भी अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा।

इस नियम के पीछे मुख्य उद्देश्य महिलाओं को पूर्ण सामाजिक सुरक्षा दिलाना और ऐसे रिश्तों से जन्म लेने वाले बच्चों को उनके वैध उत्तराधिकार, पहचान तथा कानूनी अधिकार सुलभ कराना है। राज्य सरकार की ओर से आने वाले कुछ ही दिनों में एक आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना जारी की जाएगी, जिसके माध्यम से इस कानून के धरातल पर पूर्ण रूप से प्रभावी होने की निश्चित तिथि का ऐलान कर दिया जाएगा।