ताप नियंत्रित कर सकेगा यह नया पदार्थ
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पहले ऐसा संभव ही नहीं था
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अब जरूरत के मुताबिक कार्य
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ऊष्मा को चालू या बंद करेंगे
राष्ट्रीय खबर
रांचीः वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अभूतपूर्व सामग्री (मटेरियल) विकसित की है जो ऊष्मा के पारंपरिक नियमों को चुनौती देती है। सामान्य तौर पर, अधिकांश सामग्रियों में ऊष्मा के अवशोषण और उत्सर्जन की प्रक्रियाएं आपस में गहराई से जुड़ी होती हैं। यदि कोई सतह किसी विशेष दिशा या तरंगदैर्घ्य से ऊष्मा को कुशलतापूर्वक अवशोषित करती है, तो वह उसे उसी तरह उत्सर्जित भी करती है।
विज्ञान के इस स्थापित सिद्धांत को रेसिप्रोसिटी यानी पारस्परिकता कहा जाता है। इस नियम के कारण वैज्ञानिकों के लिए किसी सामग्री में ऊष्मा के प्रवेश करने और बाहर निकलने की प्रक्रिया को स्वतंत्र रूप से नियंत्रित करना अब तक बेहद कठिन था।
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यदि इन दोनों प्रक्रियाओं को अलग किया जा सके, तो इंजीनियर ऊष्मा को बहुत अधिक सटीकता से निर्देशित कर सकते हैं। ऐसी सामग्री एक दिशा से थर्मल ऊर्जा को अवशोषित कर सकती है और उसे दूसरी दिशा में छोड़ सकती है। इससे थर्मल प्रबंधन, ऊर्जा रूपांतरण, इन्फ्रारेड सेंसिंग और थर्मल संचार तकनीकों में क्रांतिकारी सुधार हो सकता है।
इस सीमा को पार करने के लिए, ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के प्रोफेसर कोइची ओकामोटो और डॉ. शुनसुके मुराई के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने मैग्नेटो-ऑप्टिकल सामग्रियों का उपयोग करके एक नए प्रकार का उपकरण विकसित किया है। ये सामग्रियां चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में आने पर प्रकाश के साथ अपनी अंतःक्रिया के तरीके को बदल देती हैं, जिससे उनके थर्मल व्यवहार को बदलना संभव हो जाता है।
शोधकर्ताओं ने इस मैग्नेटो-ऑप्टिकल सामग्री को जीएसटी नामक एक फेज चेंज मटेरियल के साथ जोड़ा। इसके परिणामस्वरूप बना उपकरण उस दिशा को नियंत्रित कर सकता है जिसमें ऊष्मा विकिरण होती है, उस व्यवहार को चालू या बंद कर सकता है, और बिजली बंद होने के बाद भी अपने कॉन्फ़िगरेशन को बनाए रख सकता है। वास्तव में, यह ऊष्मा को ठीक उसी तरह से प्रोग्राम करने की अनुमति देता है जैसे कंप्यूटर चिप के भीतर डेटा को स्टोर और नियंत्रित किया जाता है।
डॉ. मुराई ने बताया, हमने हीट रेडिएशन को अधिक स्मार्ट तरीके से व्यवहार करने में सफलता पाई है। इस वर्किंग मॉडल के जरिए कुशल इन्फ्रारेड एमिटर्स, थर्मल-एनर्जी डिवाइस, सेंसर और फोटोनिक मेमोरी तकनीकों की एक नई पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त होगा।
यह नया डिजाइन पिछले डिजाइनों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करता है। पहले की तकनीकों में समान प्रभाव हासिल करने के लिए प्रकाश को बहुत तीव्र कोणों पर सामग्री से टकराना पड़ता था, जिससे दक्षता कम हो जाती थी। इसके विपरीत, नया उपकरण प्रकाश के सीधे टकराने पर भी प्रभावी ढंग से काम करता है। साथ ही, यह बिजली कटने के बाद भी अपनी मेमोरी (स्टोर्ड कॉन्फ़िगरेशन) को सुरक्षित रखता है, जिससे यह भविष्य के व्यावहारिक अनुप्रयोगों के लिए बेहद उपयोगी बन जाता है।
प्रोफेसर ओकामोटो के अनुसार, उनका अंतिम लक्ष्य ऐसे कॉम्पैक्ट उपकरण विकसित करना है जो ऊष्मा विकिरण को सक्रिय रूप से नियंत्रित कर सकें, ठीक वैसे ही जैसे इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं।
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