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सुरक्षित हाथों में है अरुणाचलः सेना, वायुसेना ने कर दिया बड़ा काम

अरुणाचल प्रेदश में सेना और वायुसेना एक्टिव

  • ड्रोन से रोजाना लंबी दूरी की निगरानी

  • भारी हथियार ले जाने में सक्षम वायुसेना

  • पोंजी घोटाला में ईडी ने संपत्ति कुर्की की

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : चीन समय-समय पर अपने सरकारी नक्शों में हेर-फेर करके भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश की स्थिति (स्टेटस) को लेकर भ्रम पैदा करने का प्रयास करता रहा है। इसके बावजूद, यह राज्य विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार के संपूर्ण सरकार दृष्टिकोण के तहत भारतीय सेना और वायुसेना क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रही हैं। ऊपरी असम के डिब्रूगढ़ से मेचुका घाटी और चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब तक भारतीय सुरक्षा बलों की मजबूत मौजूदगी किसी भी दुश्मन देश के दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।

ऐतिहासिक रूप से, मेचुका का 1962 के भारत-चीन युद्ध से गहरा संबंध रहा है, जब चीनी सेना ने इस पर कब्जा कर लिया था। वर्तमान में, भारतीय वायुसेना के फाइटर स्क्वाड्रन आधुनिक मल्टी-रोल एयरक्राफ्ट, उन्नत हेलीकॉप्टरों (जैसे चिनूक) और परिवहन विमानों (सी-130 और सी-17) से लैस हैं। इसके साथ ही, एस-400 जैसी मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम का नेटवर्क सुरक्षा को अभेद्य बनाता है।

बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन और सेना की इंजीनियर रेजिमेंट द्वारा दोहरे इस्तेमाल वाले इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत सड़कों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। भारतीय सेना पारंपरिक पेट्रोलिंग के साथ-साथ टैक्टिकल ड्रोन (ऑक्टोकॉप्टर और क्वाडकॉप्टर), ऑल-टेरेन वाहनों और अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर रही है। घाटी से दूसरी घाटी में सैनिकों और अल्ट्रा-लाइट होवित्ज़र तथा मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर जैसे हथियारों को तेजी से स्थानांतरित करने के लिए नियमित संयुक्त अभ्यास किए जा रहे हैं, जो दुश्मन पर रणनीतिक दबाव बनाए रखते हैं।

दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय के गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय ने बहु-करोड़ रुपये के पोंजी और मनी सर्कुलेशन घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने जीवन सुरक्षा ग्रुप ऑफ कंपनीज और उसके निदेशकों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 के तहत करीब 5.54 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इसमें 48 बैंक खातों में जमा 1.42 करोड़ रुपये और असम, मेघालय तथा पश्चिम बंगाल में स्थित 22 अचल संपत्तियां शामिल हैं।

यह जांच सीबीआई, असम सीआईडी और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय द्वारा दर्ज प्राथमिकियों और आरोप पत्रों के आधार पर शुरू की गई थी। आरोप है कि इस समूह ने पूर्वोत्तर राज्यों में लगभग 422 शाखाओं के नेटवर्क के जरिए बिना किसी वैधानिक लाइसेंस के अवैध रूप से जनता से पैसे जुटाए। कंपनियों ने आकर्षक रिटर्न का वादा करके करीब 6.88 लाख निवेशकों से 403.63 करोड़ रुपये एकत्र किए, लेकिन केवल 132.72 करोड़ रुपये ही लौटाए। ईडी के अनुसार, यह घोटाला करीब 270.91 करोड़ रुपये का है, जिसे निदेशकों और उनके परिवारों के व्यक्तिगत खातों में डायवर्ट कर अचल संपत्तियां खरीदने में इस्तेमाल किया गया। मामले की आगे की जांच जारी है।