क्या मामला वापस लेने का कोई सौदा हुआ है
एजेंसियां
न्यूयार्कः अमेरिका की एक अदालत ने गौतम अडाणी को यह खुलासा करने का निर्देश दिया है कि रिश्वतखोरी के एक मामले में उनके और सात अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक अभियोग (indictment) को खारिज करने के अमेरिकी सरकार के अनुरोध के संबंध में किसी के द्वारा कुछ वादा, प्रस्ताव, विनिमय या स्वीकार किया गया है या नहीं। न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के अमेरिकी जिला न्यायालय के न्यायाधीश निकोलस जी गरुफिस ने यूएसए बनाम गौतम अडाणी शीर्षक वाले मामले में अडाणी को 15 जुलाई तक इस संबंध में एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने अडाणी से दो विशिष्ट प्रश्नों के उत्तर देने को कहा है, पहला, क्या वह अभियोग को खारिज करने के संबंध में किसी व्यक्ति द्वारा किए गए किसी वादे, प्रस्ताव, मांग, प्राप्ति, सहमति या स्वीकार्यता से अवगत हैं? और दूसरा, क्या वह इस अभियोग को खारिज करने के बदले में किसी भी चीज के लेन-देन से जुड़े समझौते के बारे में जानते हैं? यह आदेश प्रधान मुख्य सहयोगी उप अटॉर्नी जनरल आर ट्रेंट मैककॉप्टर द्वारा अदालत के उस पुराने निर्देश का जवाब देने के बाद आया है, जिसमें न्याय विभाग से यह बताने को कहा गया था कि वह अडाणी के खिलाफ सभी आरोपों को बिना किसी शर्त क्यों खारिज करना चाहता था।
मैककॉप्टर ने खुद को इस अनुरोध के पीछे अंतिम और एकमात्र निर्णयकर्ता बताते हुए उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि यह निर्णय अडाणी द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका में निवेश करने के वादे से जुड़ा था। हालांकि, अदालत ने कहा कि मैककॉप्टर के जवाब ने पहली बार एक या अधिक प्रतिवादियों से जुड़े किसी ऐसे समझौते की संभावना पैदा की है, जिसे न तो रिकॉर्ड पर रखा गया और न ही पहले अदालत को इसकी जानकारी दी गई थी। आदेश में कहा गया, 26 जून 2026 के मेमोरेंडम और ऑर्डर पर श्री मैककॉप्टर का जवाब पहली बार अभियोग को खारिज करने के संबंध में एक संभावित समझौते (जिसमें एक या कई प्रतिवादी शामिल हो सकते हैं) की आशंका पैदा करता है, जिसे न तो पहले दर्ज किया गया है और न ही अदालत के ध्यान में लाया गया है।
इस अभियोग में आरोप लगाया गया था कि गौतम अडाणी, सागर अडाणी, विनीत जैन, रंजीत गुप्ता और अन्य ने एक सौर ऊर्जा परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय राज्य सरकारों के अधिकारियों को रिश्वत देने की योजना बनाई थी। अभियोग के अनुसार, राज्य की बिजली वितरण कंपनियों के अधिकारियों को 2,029 करोड़ रुपये (लगभग 26.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर) की रिश्वत देने का वादा किया गया था, जिसमें से 1,750 करोड़ रुपये कथित तौर पर सात गीगावाट सौर ऊर्जा की खरीद सुरक्षित करने के लिए आंध्र प्रदेश के अधिकारियों के लिए रखे गए थे।
इसके बाद डीओजे ने सभी आठ आरोपियों के खिलाफ अभियोग खारिज करने की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था। हालांकि, न्यायाधीश गरुफिस ने 25 जून को इस अनुरोध को तुरंत स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और इसके बजाय डीओजे से इसे खारिज करने के कारणों को स्पष्ट करने को कहा था।