Breaking News in Hindi

ओडिशा भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं: सत्ता में आते ही गुटबाजी हावी

मोहन-धर्मेन्द्र के बीच बढ़ती दूरी बनी चर्चा का विषय

एक के बाद एक दरार के संकेत

संभलपुर तक सिमटे हैं धर्मेंद्र प्रधान

बीजद ने कहा डबल इंजन का टकराव

प्रसन्न महांति

भुवनेश्वरः ओडिशा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। राज्य में करीब 27 महीने पुरानी मोहन चरण माझी की सरकार गंभीर गुटबाजी का शिकार होती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और वरिष्ठ नेता तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच की दूरियां अब केवल दबी जुबान की चर्चा नहीं, बल्कि सार्वजनिक मंचों पर साफ तौर पर दिखाई देने वाली हकीकत बन चुकी है। पार्टी और सरकार के शीर्ष नेतृत्व के बीच तालमेल का अभाव राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गया है।

इस आंतरिक कलह के कई उदाहरण हाल ही में सामने आए हैं। कुछ समय पहले कटक में आयोजित भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी की एक बेहद अहम बैठक में धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा में मौजूद होने के बावजूद शामिल नहीं हुए। इस बैठक से सांसद अपराजिता सारंगी भी नदारद रहीं। पार्टी संगठन की इस सबसे बड़ी बैठक से दिग्गजों का इस तरह गायब रहना सामान्य घटना नहीं है। इसके अलावा, संभलपुर में जिलाध्यक्ष द्वारा आयोजित नुआखाई कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रधान पहुँचे, लेकिन स्थानीय विधायक और कद्दावर भाजपा नेता जयनारायण मिश्रा उससे दूरी बनाए रहे। वहीं, संभलपुर में ही डॉप्लर रडार के एक महत्वपूर्ण उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री मोहन माझी तो मौजूद थे, लेकिन स्थानीय सांसद होने के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान ने इस कार्यक्रम से किनारा कर लिया।

सबसे ताजा और स्पष्ट उदाहरण 17 तारीख को कुचिंडा का है। पंचायती राज मंत्री रबी नाइक की माता जी के एकादशाह कार्यक्रम पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री कई मंत्रियों और विधायकों के साथ पहुँचे थे। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान, जो वहीं मौजूद थे, मुख्यमंत्री के आने से ठीक पहले वहाँ से चले गए। शोक सभा जैसे मौकों पर भी दोनों नेताओं का एक साथ न टिक पाना उनके बीच के गहरे मतभेदों को उजागर करता है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल से नाता टूटने के बाद से धर्मेंद्र प्रधान की सक्रियता मुख्य रूप से अपने संसदीय क्षेत्र संभलपुर तक ही सीमित हो गई है। दिल्ली की राजनीति से लौटने के बाद प्रदेश की राजनीति में उनकी पैठ मजबूत हुई है और पार्टी के एक बड़े धड़े पर उनका अब भी काफी प्रभाव है। जानकारों का मानना है कि पार्टी के भीतर दो पावर सेंटर (सत्ता केंद्र) बनने से सरकारी फैसलों में भी खींचतान शुरू हो गई है। विपक्षी बीजू जनता दल (बीजेडी) इसे ‘डबल इंजन’ सरकार का आपसी टकराव करार दे रहा है। यदि भाजपा आलाकमान ने समय रहते इस अंदरूनी कलह पर लगाम नहीं लगाई, तो 24 साल के लंबे संघर्ष के बाद सत्ता में आई पार्टी के लिए भविष्य में गंभीर राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है।