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मणिपुर के उखरुल में जबर्दस्त तलाशी अभियान

असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हुआ हमला

उत्तर पूर्व संवाददाता

गुवाहाटीः मणिपुर के उखरुल जिले में 6 जुलाई को उग्रवादियों द्वारा असम राइफल्स के काफिले पर किए गए घात लगाकर हमले के बाद सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। इस हमले में दो जवान शहीद हो गए थे। अब हमलावरों को पकड़ने और उनके छिपे हुए हथियारों के जखीरे को बरामद करने के लिए असम राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल और मणिपुर पुलिस ने उखरुल में एक व्यापक संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया है।

यह अभियान 10 जुलाई 2026 को उखरुल जिले के नुंगशांग इलाके में शुरू हुआ। यह कार्रवाई उग्रवादियों द्वारा 40वीं असम राइफल्स के काफिले को निशाना बनाए जाने के कुछ दिनों बाद की गई है, जो हाल के महीनों में क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर हुए सबसे घातक हमलों में से एक है।

असम राइफल्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इस अभियान की घोषणा करते हुए कहा, मणिपुर के उखरुल में घातक घात लगाकर किए गए हमले के बाद सुरक्षा बलों ने व्यापक संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया। असम राइफल्स ने सीमा सुरक्षा बल और मणिपुर पुलिस के साथ समन्वय करते हुए 10 जुलाई 2026 को मणिपुर के उखरुल जिले के नुंगशांग इलाके में एक बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया। यह कार्रवाई 6 जुलाई 2026 के उस दुखद हमले के बाद की गई है, जिसमें असम राइफल्स के दो जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था।

संयुक्त बल अपराधियों का पता लगाने, छिपे हुए जखीरे को बरामद करने और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवासीय क्षेत्रों, संवेदनशील मार्गों और आसपास के जंगलों में सघन तलाशी अभियान (कॉम्बिंग) चला रहा है। यह अभियान जारी है, जो शांति बहाल करने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए सुरक्षा बलों की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराता है।

जारी अभियान के तहत सुरक्षाकर्मी नुंगशांग और उसके आसपास के घने जंगलों, संवेदनशील मार्गों तथा आवासीय क्षेत्रों की छानबीन कर रहे हैं। इस कवायद का उद्देश्य हमले में शामिल लोगों का पता लगाना, हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद करना तथा क्षेत्र में आगे किसी भी उग्रवादी गतिविधि को रोकना है।

यह अभियान 6 जुलाई को उखरुल जिले में हुए हमले के बाद चलाया जा रहा है, जिसमें उग्रवादियों द्वारा काफिले पर घात लगाकर किए गए हमले के बाद असम राइफल्स के दो जवान शहीद हो गए थे और लगभग आठ अन्य घायल हो गए थे। इस हमले के बाद लगभग एक घंटे तक भीषण गोलीबारी चली थी।

सूत्रों के अनुसार, अज्ञात उग्रवादियों ने शांगशाक के पास लुंगशांग कोंग गांव के पास एक पुल के दोनों ओर तीन इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस लगाए थे। 40वीं असम राइफल्स का काफिला कथित तौर पर अपने कैंप से एक पुलिस स्टेशन की ओर जा रहा था, तभी दो आईईडी में विस्फोट हो गया।

धमाकों के तुरंत बाद उग्रवादियों ने कई दिशाओं से भारी गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षाकर्मियों ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई की, जिससे दोनों ओर से भीषण गोलीबारी हुई। बाद में तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने हमले वाली जगह से एक जिंदा आईईडी भी बरामद किया। इलाके में कड़ी निगरानी रखी जा रही है और अपराधियों को पकड़ने के प्रयास जारी हैं।