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रूस भाग चुके अपदस्थ पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ फैसला आया

अदालत ने बशर अल असद को मौत की सजा दी

दमिश्कः सीरिया की एक अदालत ने मंगलवार को देश के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को गृहयुद्ध से पहले और उसके दौरान हत्या, प्रताड़ना तथा मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई है। सीरियाई सरकारी समाचार एजेंसी साना के अनुसार, दमिश्क की चौथी आपराधिक अदालत द्वारा दी गई यह सजा 2024 में इस तानाशाह के सत्ता से बेदखल होने के बाद अल-असद के खिलाफ पहली कानूनी कार्रवाई है। सरकारी टीवी पर प्रसारित अदालत की कार्यवाही के दौरान न्यायाधीश फखरुद्दीन अल-आर्यन ने कहा, बशर अल-असद ने युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध करने के लिए सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग किया।

अदालत ने अपदस्थ राष्ट्रपति के भाई माहेर अल-असद को भी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई है। माहेर 4th आर्मर्ड डिवीजन का नेतृत्व करते थे, जो सीरियाई सेना की वह इकाई थी जिसने 2011 के बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान असंतुष्टों को कुचला था और 2024 में अपने विघटन तक शासन के खिलाफ विद्रोह करने वालों से सीरियाई क्षेत्र को वापस छीना था। कार्यकर्ताओं ने इस सैन्य इकाई पर हत्या, प्रताड़ना, नशीली दवाओं की तस्करी और विद्रोहियों तथा नागरिकों को नजरबंद रखने के गंभीर आरोप लगाए थे।

अल-असद, उनके भाई और छह अन्य पूर्व अधिकारियों को सुनाई गई ये सजाएं फिलहाल ज्यादातर प्रतीकात्मक हैं। सरकार के पतन और परिवार के 50 साल के शासन के अंत के बाद बशर और उनके भाई ने रूस में शरण ले ली थी। अदालत ने छह अन्य अधिकारियों को भी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई। मंगलवार को अदालत में पेश होने वाले शासन के एकमात्र अधिकारी उनके ममेरे भाई आतिफ नजीब थे, जिन्होंने सीरियाई असंतोष को कुचलने में भी अहम भूमिका निभाई थी।

जेल की पोशाक पहने हुए नजीब एक पिंजरे में खड़े थे जब उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। पीड़ितों के परिवारों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील अदनान अल-मसलमेह ने इसे सभी घायलों, शहीदों, बंदियों और उन सीरियाई लोगों के लिए न्याय का दिन बताया जिन्हें अपना देश छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इन सजाओं से अल-असद और उनके सहयोगियों के सीरिया में न्याय के कटघरे में खड़े होने की संभावना और कम हो जाएगी। सीरियाई सेंटर फॉर लीगल स्टडीज एंड रिसर्च के प्रमुख अनवर अल-बुन्नी ने कहा कि ये सजाएं केवल दिखावटी न्याय हैं, क्योंकि कोई भी देश किसी ऐसे व्यक्ति को वापस नहीं सौंपेगा जिसे मौत की सजा सुनाई जा चुकी हो।

सनद रहे कि 2000 में पिता की मृत्यु के बाद बशर अल-असद राष्ट्रपति बने थे। 2024 में हयात तहरीर अल-शाम नामक संगठन ने उनकी सरकार का तख्तापलट कर दिया था। इसके बाद 2025 में इस समूह के नेता अहमद अल-शारा ने नए राष्ट्रपति के रूप में कमान संभाली।