कूटनीतिक समझौता आखिर अमल में लाया गया
एनआईए ने आगे कार्रवाई नहीं की
नियम मुताबिक डिफाल्ट जमानत
आरोपियों का आवेदन स्वीकारा गया
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: दिल्ली की एक विशेष एनआईए (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) अदालत ने बुधवार को छह यूक्रेनी नागरिकों को जमानत दे दी। इन सभी नागरिकों को इस साल मार्च के महीने में भारत और म्यांमार में जातीय सशस्त्र विद्रोहियों के लिए एक गुप्त प्रशिक्षण शिविर संचालित करने के गंभीर आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया था। इस मामले से जुड़े कूटनीतिक और कानूनी घटनाक्रम के बीच यह एक बड़ा फैसला माना जा रहा है।
अदालत के निर्देशानुसार, इन सभी आरोपियों को 1-1 लाख रुपये के नकद मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, विदेशी नागरिकों से जुड़े आव्रजन मामलों की देखरेख करने वाले क्षेत्रीय विदेशी पंजीकरण कार्यालय द्वारा प्रत्येक आरोपी पर 5.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस जुर्माने के भुगतान के बाद आव्रजन और विदेशी अधिनियम के तहत दर्ज अपराधों को सुलझा लिया गया, क्योंकि अवैध प्रवेश और वीजा उल्लंघन से जुड़े ऐसे मामले एफआरआरओ स्तर पर आपसी समझौते के योग्य होते हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कानूनी प्रक्रिया और राहत किसी अघोषित कूटनीतिक बातचीत के तहत आपसी सहमति से आगे बढ़ी है, जिसके बाद सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने इस मामले में अपने कदम पीछे खींच लिए हैं।
विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इन छह यूक्रेनी नागरिकों को उनके अमेरिकी सह-आरोपी मैथ्यू आरोन वैन डिक के मामले में दी गई समानता के आधार पर डिफ़ॉल्ट जमानत का लाभ दिया जा रहा है। इससे पहले 18 सितंबर को न्यायाधीश ने मैथ्यू आरोन डिक को जमानत देते समय एनआईए के कड़े विरोध को खारिज कर दिया था। उस दौरान अदालत ने यह टिप्पणी की थी कि भले ही इस मामले की विस्तृत जांच अभी पूरी होने से काफी दूर है, लेकिन इस शुरुआती स्तर पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आरोपी डिफ़ॉल्ट जमानत का हकदार नहीं है।
कानूनी प्रावधानों के तहत, गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के मामलों में यदि जांच एजेंसी किसी आरोपी की गिरफ्तारी के 180 दिनों के भीतर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत अपराधों से जुड़ी चार्जशीट अदालत में दाखिल करने में विफल रहती है, तो आरोपी डिफ़ॉल्ट जमानत पाने का कानूनी हकदार बन जाता है। इसी समयासीमा के आधार पर अदालत ने अन्य छह यूक्रेनी नागरिकों को भी डिफ़ॉल्ट जमानत के लिए आवेदन करने की अनुमति दी थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है।