पत्रकार रवि नायर को मानसा अदालत ने जमानत दी
अडाणी के खिलाफ मानहानी के मामले में अदालती कार्रवाई
गांधीनगर की अदालत का यह फैसला
पहले अंतरिम राहत से इंकार किया था
अडानी इंटरप्राइसेज के दर्ज किया केस
राष्ट्रीय खबर
अहमदाबादः गुजरात के गांधीनगर की एक सत्र अदालत ने गुरुवार को पत्रकार रवि नायर को जमानत दे दी, जिन्हें अडानी एंटरप्राइजेज द्वारा दायर एक आपराधिक मानहानि मामले में अदालत में पेश न होने के कारण एक हफ्ते पहले गिरफ्तार किया गया था। प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश आशीष जे.एस. मल्होत्रा ने 17 सितंबर को नायर की गिरफ्तारी के मामले में उनकी जमानत की अर्जी मंजूर कर ली।
उनके वकील रोनित जॉय ने बताया कि इसी अदालत द्वारा उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। अदालत ने मामले में उनकी सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश न होने पर यह वारंट जारी किया था। वकील ने बताया, शनिवार को सत्र अदालत में उनकी जमानत याचिका दायर की गई थी और सोमवार को इस पर सुनवाई हुई थी। आज अदालत ने उनकी अर्जी मंजूर कर ली।
सत्र अदालत में जमानत याचिका के साथ-साथ नायर ने गुजरात उच्च कोर्ट में एनबीडब्ल्यू पर रोक लगाने के लिए भी एक याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने बुधवार को उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया और नायर के वकील से यह सवाल किया कि उन्होंने यह क्यों नहीं बताया कि उन्होंने सत्र अदालत में भी इस मामले में जमानत के लिए आवेदन किया है। उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि उसे इस बारे में जानकारी होती, तो वह शनिवार को इस मामले में तत्काल सुनवाई की अनुमति शायद न देती।
गांधीनगर की मानसा अदालत ने 10 फरवरी 2026 को अडानी एंटरप्राइजेज द्वारा 3 सितंबर 2021 को उनके कुछ ट्वीट्स और लेखों को लेकर दायर आपराधिक मानहानि मुकदमे में नायर को एक साल की कैद की सजा सुनाई थी। पत्रकार ने गांधीनगर की एक अपीलीय अदालत में अपनी सजा को चुनौती दी, जहां से उन्हें 9 मार्च 2026 को इस शर्त पर जमानत मिली थी कि वे अपनी अपील की सुनवाई के दौरान उपस्थित रहेंगे। हालांकि, उनके वकीलों ने बताया कि अपने गृह राज्य केरल से यात्रा करने के कारण और खराब स्वास्थ्य के चलते वे 3 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके।
अपीयलीय अदालत ने व्यक्तिगत पेशी से छूट के उनके अनुरोध को खारिज कर दिया और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। 17 सितंबर को अदालत ने याचिकाकर्ता को हिरासत में लेने का निर्देश दिया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था।