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भगोड़ा एआईजी राजजीत सिंह गिरफ्तार

लगभग तीन साल तक पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे थे

पहले ही सेवा से बर्खास्त हुआ था

पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया

कई मामलों में उसकी तलाश थी

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़ः पंजाब की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक गलियारों से एक बेहद सनसनीखेज और बड़ा मामला सामने आया है। संदिग्ध ड्रग्स तस्करी, पुलिस-तस्कर गठजोड़ और जबरन वसूली के गंभीर मामलों में पिछले लगभग तीन वर्षों से फरार चल रहे पंजाब पुलिस के बर्खास्त सहायक महानिरीक्षक राजजीत सिंह ने आखिरकार पटियाला पुलिस और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इस आत्मसमर्पण के साथ ही कानून की नजरों से बचकर लंबे समय से भूमिगत रहने वाले इस कुख्यात पूर्व अधिकारी के फरार रहने के सिलसिले का अंत हो गया है।

राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने इसकी औपचारिक पुष्टि करते हुए बताया कि तकनीकी निगरानी और खुफिया इनपुट के आधार पर इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। गिरफ्तारी का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्वयह उच्च-प्रोफाइल गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब राज्य में आगामी 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों की सरगर्मियां तेजी पकड़ रही हैं।

मौजूदा ‘आप’ (आम आदमी पार्टी) सरकार राज्य में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग (ड्रग्स) और संगठित अपराध के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति तथा की गई सख्त कानूनी कार्रवाइयों को अपनी सबसे बड़ी सफलताओं के रूप में रेखांकित कर रही है। दूसरी ओर, विपक्षी दल लगातार यह सवाल उठाते रहे थे कि सरकार पुलिस महकमे के उन रसूखदार और वरिष्ठ अधिकारियों तक हाथ क्यों नहीं पहुंच पा रही है, जिनके तार सीधे तौर पर ड्रग्स माफिया से जुड़े रहे हैं।

ऐसे में इस गिरफ्तारी को सरकार और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। राजजीत सिंह का यह पूरा मामला साल 2017 में उस समय सुर्खियों में आया था जब स्पेशल टास्क फोर्स ने बर्खास्त इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह को ड्रग्स तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश पर गठित विशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

एसआईटी की जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि तरनतारन और मोगा जैसे संवेदनशील जिलों में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के रूप में तैनात रहे राजजीत सिंह ने कथित तौर पर तस्करों को संरक्षण दिया, कानूनी पेचीदगियों का फायदा उठाकर आरोपियों को बचाया और झूठे मामलों में बेकसूर लोगों को फंसाया।

जातिगत और आधिकारिक पद का दुरुपयोग कर अवैध वसूली करने तथा ड्रग्स नेटवर्क को बढ़ावा देने के पुख्ता सबूत मिलने के बाद, भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने अप्रैल 2023 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत राजजीत सिंह को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया था। वह पंजाब पुलिस के इतिहास में ऐसे पहले एआईजी रैंक के अधिकारी बने थे जिन्हें नशीली दवाओं के मामलों से जुड़े गठजोड़ के कारण बर्खास्त किया गया था।

कानूनी शिकंजा और आगे की कार्रवाई   बर्खास्तगी के बाद से ही विजिलेंस ब्यूरो द्वारा उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा जबरन वसूली और एनडीपीएस अधिनियम की धाराओं के तहत भी मुकदमे चलाए गए।

उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद से राजजीत सिंह कानून की गिरफ्त से दूर लगातार ठिकाने बदल रहे थे और उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया था।   हाल ही में उच्चतम न्यायालय द्वारा इस मामले में सख्त रुख अपनाए जाने और आत्मसमर्पण के निर्देश के बाद उन्होंने पटियाला में सरेंडर किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि उनकी इस लंबी फरारी के दौरान किसने और कहाँ-कहाँ उन्हें शरण दी थी तथा इस अवैध साम्राज्य से जुड़े अन्य वित्तीय स्रोत और चेहरे कौन-कौन हैं।