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एनसीपीआई के केंद्रीय दफ्तर पर आदमी कम पुलिस ज्यादा

अब केंद्रीय सुरक्षा बलों के कब्जे में है यह अपरिचित सा इलाका

  • केंद्रीय बल पहले ही तैनात हो गये थे

  • पार्टी पदाधिकारियों को सूचना नहीं है

  • टीएमसी सांसदों के गुट ने विलय किया

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में हालिया विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर गहराता राजनीतिक संकट अब एक नाटकीय मोड़ पर पहुँच चुका है। सोमवार को पार्टी कार्यालय का मुख्य लोहे का गेट अंदर से बंद रहा और वहां केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात रहे, जिसके चलते किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इस बीच, पार्टी के अंदर मचे इस घमासान के केंद्र में टीएमसी के बागी सांसदों द्वारा एनसीपीआई में विलय की घोषणा है, जिसने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है।

विलय की इस अचानक हुई घोषणा ने स्वयं एनसीपीआई के पदाधिकारियों को भी सकते में डाल दिया है। एनसीपीआई के महासचिव शांतनु डे ने स्वीकार किया कि सोमवार सुबह तक अधिकांश पदाधिकारियों को इस विलय की कोई जानकारी नहीं थी। हालांकि, शाम तक उन्होंने विलय वार्ता की पुष्टि की, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर इसे लेकर काफी भ्रम की स्थिति है।

डे ने कहा, जून 2022 में पार्टी की नींव रखने की चर्चा हुई थी और जनवरी 2023 में इसे सांकराइल कार्यालय में पंजीकृत कराया गया था। 2024 में हमने त्रिपुरा का कार्यालय बंद कर दिया था। आज संस्थापक सदस्यों की बैठक हुई, लेकिन हमें टीएमसी सांसदों की ओर से शाम तक कोई औपचारिक संचार प्राप्त नहीं हुआ है।

वहीं, एनसीपीआई के युवा महासचिव टीटास भट्टाचार्य ने इस पूरी घटनाक्रम पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, हम टीएमसी सांसदों के विलय के प्रस्ताव का स्वागत करते हैं। अब तक हम एक छोटी राजनीतिक इकाई थे जिसे बहुत कम लोग जानते थे, लेकिन अचानक हुई इन नाटकीय घटनाओं ने सब कुछ बदल दिया है।

हालांकि, हमें यह स्पष्ट नहीं है कि विलय का निर्णय किसने लिया है, हम इसे समझने की कोशिश कर रहे हैं। टीएमसी के बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने मीडिया को जानकारी दी कि ज्योतिप्रकाश चटर्जी एनसीपीआई के अध्यक्ष हैं, जिससे संकेत मिलता है कि बागी गुट ने इस विलय के लिए पहले से ही जमीन तैयार कर ली थी।

यह घटनाक्रम टीएमसी के लिए एक अस्तित्वगत संकट की तरह है। पिछले महीने विधानसभा चुनावों में मिली हार के तुरंत बाद पार्टी में फूट पड़ गई। स्थिति इतनी गंभीर है कि पार्टी के 80 में से कम से कम 59 विधायकों ने एक बागी गुट बना लिया है। इसके अलावा, कम से कम 20 सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सूचित किया है कि उन्होंने खुद को एनसीपीआई में विलय कर लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा अचानक इस तरह का बड़ा कदम उठाना ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है, जो अब अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है।