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पुडुचेरी चुनाव में एन रंगास्वामी का करिश्मा बरकरार

लगातार पांचवीं बार संभालेंगे सत्ता की कमान

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के परिणामों ने एक बार फिर ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस के संस्थापक और निवर्तमान मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी के राजनीतिक वर्चस्व पर मुहर लगा दी है। बिखरे हुए विपक्ष, रंगास्वामी के व्यक्तिगत आकर्षण और उनकी सरकार द्वारा चलाई गई कल्याणकारी योजनाओं के दम पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन केंद्र शासित प्रदेश में अपनी सत्ता बरकरार रखने में सफल रहा है। चुनावी आंकड़ों के अनुसार, 30 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए ने बहुमत के 16 के आंकड़े को पार करते हुए कुल 18 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसमें एआईएनआरसी को 12, भाजपा को 4, एआईएडमके को 1 और एलजेके को 1 सीट मिली है।

दूसरी ओर, विपक्षी इंडिया गठबंधन केवल 6 सीटों पर सिमट कर रह गया, जिसमें द्रमुक ने 5 और कांग्रेस ने मात्र 1 सीट जीती। तीन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने कब्जा किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष एआईएनआरसी-भाजपा-एआईएडमके गठबंधन के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा पेश करने में पूरी तरह विफल रहा। कांग्रेस और द्रमुक के बीच आंतरिक कलह और सीट बंटवारे को लेकर भ्रम की स्थिति ने उनकी संभावनाओं को खत्म कर दिया। विशेष रूप से, कांग्रेस ने द्रमुक को आवंटित पांच निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतार दिए, जिससे कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच भारी असमंजस पैदा हुआ।

एन रंगास्वामी की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे उनकी मक्कल मुदलवर (जनता के मुख्यमंत्री) वाली छवि का बड़ा योगदान है। वह अपनी सादगी और आम जनता के लिए सुलभ होने के कारण बेहद लोकप्रिय हैं। उन्होंने चुनाव में दो सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत हासिल की। थट्टनचावड़ी सीट पर उनकी जीत का अंतर 4,441 मतों से बढ़ना उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता को दर्शाता है। इसके अलावा, उनकी सरकार की मुफ्त उपहार वाली राजनीति ने भी मतदाताओं को प्रभावित किया। महिलाओं को 2,500 रुपये की मासिक सहायता, मुफ्त अनाज और कन्या सुरक्षा योजना के तहत बढ़ी हुई जमा राशि जैसे वादों ने जमीनी स्तर पर काम किया।

विपक्ष की हार का मुख्य कारण सत्ता विरोधी लहर का अभाव और गठबंधन के भीतर का अंतर्विरोध रहा। कांग्रेस का दिशाहीन अभियान और द्रमुक के साथ तालमेल की कमी ने एनडीए के रास्ते को आसान बना दिया। अब सबकी निगाहें कैबिनेट गठन पर टिकी हैं। चर्चा है कि इस बार भाजपा गठबंधन में अपनी मजबूत स्थिति को देखते हुए उपमुख्यमंत्री पद की मांग कर सकती है। रंगास्वामी अब रिकॉर्ड पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए तैयार हैं।