विश्वविद्यालय नियुक्तियों पर गतिरोध समाप्त
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काफी दिनों से चल रहा था विवाद
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राज्यपाल ने प्रस्ताव को मंजूरी दी
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बेहतर पारदर्शिता का दावा किया गया
रांचीः झारखंड के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का मार्ग प्रशस्त करते हुए, झारखंड राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 को राज्यपाल की मंजूरी मिल गई है। यह कदम न केवल राजभवन और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को समाप्त करेगा, बल्कि विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक और शैक्षणिक गुणवत्ता में भी सुधार लाएगा।
इस संशोधन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी कुलपति और प्रतिकुलपति की चयन प्रक्रिया है। पहले इन पदों पर नियुक्ति राज्यपाल का एकल विशेषाधिकार माना जाता था, जिसमें वे मुख्यमंत्री की केवल सलाह लेते थे। अब सलाह शब्द को संयुक्त विचार-विमर्श से बदल दिया गया है। इसका सीधा अर्थ है कि अब नियुक्ति की फाइल पर राजभवन और मुख्यमंत्री कार्यालय दोनों की सहमति अनिवार्य होगी। यह मॉडल प्रशासनिक टकराव को कम करेगा और नियुक्तियों में राजनीतिक व शैक्षणिक संतुलन सुनिश्चित करेगा।
भविष्य में होने वाली नियुक्तियों के लिए एक स्पष्ट रूपरेखा तैयार की गई है: सर्च कमेटी का गठन: रिक्तियों के लिए 3 से 5 योग्य विशेषज्ञों का एक पैनल बनाया जाएगा। वरीयता का अभाव: कमेटी नामों की सिफारिश करते समय किसी को नंबर वन या नंबर टू नहीं बताएगी, बल्कि बंद लिफाफे में योग्य उम्मीदवारों की सूची देगी। समयबद्ध प्रक्रिया: कुलपति का पद खाली होने से 6 महीने पहले ही भर्ती की प्रक्रिया शुरू करनी होगी, ताकि पद रिक्त होते ही नए कुलपति कार्यभार संभाल सकें। विधेयक केवल प्रशासनिक नियुक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें छात्रों की समस्याओं का भी समाधान खोजा गया है:
अक्सर देखा गया है कि विश्वविद्यालयों में परिणाम महीनों लटके रहते हैं। अब कानूनन परीक्षा परिणाम 30 से 45 दिनों के भीतर घोषित करना अनिवार्य होगा। प्रशासनिक कामकाज को गति देने के लिए सीनेट की बैठक अब वर्ष में कम से कम दो बार आयोजित की जाएगी। इससे बजट और नीतिगत निर्णयों में देरी नहीं होगी।
यह संशोधन झारखंड के उच्च शिक्षा तंत्र को अधिक लोकतांत्रिक और जवाबदेह बनाता है। इससे न केवल नियुक्तियों में होने वाली देरी थमेगी, बल्कि सरकार और राजभवन के बीच एक बेहतर समन्वय भी स्थापित होगा। अंततः इसका सबसे बड़ा लाभ उन हजारों छात्रों को मिलेगा, जिनका शैक्षणिक सत्र परीक्षाओं और परिणामों में देरी के कारण प्रभावित होता था।