मोदी सरकार की मंशा चुनावी मानचित्र को बदलना ही है
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महिला आरक्षण के पीछे छिपा है एजेंडा
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हर बार इस तरह का हथकंडा क्यों है
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जाति जनगणना से भयभीत है भाजपा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि संविधान संशोधन विधेयक सरकार की एक घबराहट भरी प्रतिक्रिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य दक्षिण भारतीय, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों से उनका प्रतिनिधित्व छीनकर देश के चुनावी मानचित्र को बदलना है। उन्होंने इसे राष्ट्र-विरोधी कृत्य करार देते हुए कहा कि विपक्ष राष्ट्र-राज्य पर हमले के इस प्रयास को विफल करेगा और इस विधेयक को यहीं हरा देगा।
राहुल गांधी ने कहा, यह किसी राष्ट्र-विरोधी कृत्य से कम नहीं है। हम किसी भी परिस्थिति में आपको ऐसा नहीं करने देंगे। पूरा विपक्ष आपके इस प्रयास को हराएगा और दलितों एवं पिछड़ों को समाज में उनके उचित स्थान से वंचित नहीं होने देगा। महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग के गठन के लिए पेश किए गए तीन विधेयकों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता ने कहा, यह महिलाओं का बिल नहीं है क्योंकि इसका महिला सशक्तिकरण से कोई संबंध नहीं है… यह विधेयक भारत की महिलाओं के पीछे छिपकर देश के चुनावी मानचित्र को बदलने का एक प्रयास है।
श्री गांधी ने सुझाव दिया कि सरकार को कार्यान्वयन के लिए 2023 का महिला आरक्षण अधिनियम वापस लाना चाहिए, जिसे पारित करने में विपक्ष तुरंत मदद करेगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार का एजेंडा पिछड़ों को प्रतिनिधित्व देने से रोकना है और यह सुनिश्चित करना है कि अगले 15 वर्षों तक जाति जनगणना का प्रतिनिधित्व से कोई लेना-देना न रहे।
उन्होंने आगे कहा, वे अपनी शक्ति कम होने से डरे हुए हैं और भारतीय राजनीतिक मानचित्र को फिर से व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहे हैं। गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार दक्षिण, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों को बता रही है कि भाजपा को सत्ता में बनाए रखने के लिए उनका प्रतिनिधित्व छीना जा रहा है। उन्होंने इन राज्यों को आश्वासन दिया कि विपक्ष भारत संघ में उनके प्रतिनिधित्व को आंच नहीं आने देगा।
गांधी ने कहा कि भाजपा जानती थी कि यह विधेयक पारित नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो उद्देश्य हैं—चुनी हुई भौगोलिक स्थिति को बदलना और खुद को महिला समर्थक दिखाना। उन्होंने प्रधानमंत्री के गुरुवार के भाषण को कम ऊर्जा वाला बताया। अंत में, उन्होंने सरकार पर लोगों और सशस्त्र बलों के पीछे छिपने का आरोप लगाते हुए कहा, भाजपा खुद को ही भारत की जनता और सेना समझती है, लेकिन आप न तो जनता हैं और न ही सेना, इसलिए उनके पीछे छिपना बंद करें।