Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Haryana Govt News: सेवानिवृत्त अधिकारियों की दोबारा नियुक्ति पर सरकार सख्त; स्टाफ से हटाए गए 6 कर्मच... Faridabad Sewer Death: सफाई कर्मचारी की मौत पर राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग सख्त; दोषी अधिकारियों पर... Kaithal Encounter: कैथल में पुलिस और बदमाशों के बीच डबल मुठभेड़; 3 आरोपी गोली लगने से घायल, एक फरार Nuh Road Accident: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक हादसा; ट्रक से टकराई कार, 4 लोगों की मौत Charkhi Dadri News: ई-ट्राईसाइकिल में आग लगने से पूर्व फौजी की जिंदा जलकर मौत; गांव में मचा कोहराम Sagar Self-Immolation Case: वाहन सीज होने से परेशान युवक ने ऑफिस में छिड़का पेट्रोल; मकरोनिया में हड... Chhindwara School Admission: 9वीं में दाखिले के लिए 13 साल की उम्र अनिवार्य, नियम के पेंच में फंसे 3... Land Record Fraud in Sheopur: कराहल में पटवारी ने अपनी आईडी का किया गलत इस्तेमाल; आदिवासी किसानों की... Mahakaleshwar Temple Ujjain: महाकाल मंदिर में युवकों का अमर्यादित व्यवहार; गार्ड से हाथापाई का वीडिय... Barwani News: आवारा कुत्तों का खौफनाक हमला; 35 वर्षीय महिला को नोच-नोच कर मार डाला

इकतीस फीट लंबा टेरर क्रो डायनासोर भी खाता था

अपने पूर्व अनुभवों का लाभ उठाकर जीवंत प्रतिकृति तैयार की

  • एक स्कूल बस जितना विशाल शिकारी

  • डॉ. डेविड श्लीमर का निरंतर प्रयास रहा

  • थ्री डी तकनीक से यह जीवंत लगता है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः करोड़ों साल पहले धरती पर राज करने वाले सबसे भयानक शिकारियों में से एक, डेइनोसुचस, एक बार फिर चर्चा में है। कोलंबस स्टेट यूनिवर्सिटी में भूविज्ञान के प्रोफेसर और इस विशालकाय जीव के विशेषज्ञ डॉ. डेविड श्लीमर के दशकों के शोध के परिणामस्वरूप, इस प्रागैतिहासिक दैत्य का पहला वैज्ञानिक रूप से सटीक और पूर्ण कंकाल प्रतिकृति तैयार कर ली गई है।

देखें इससे संबंधित वीडियो

आज से लगभग 8.3 करोड़ से 7.6 करोड़ साल पहले, क्रीटेशियस काल के दौरान यह भयानक मगरमच्छ उत्तर अमेरिका के पूर्वी हिस्से में पाया जाता था। इसकी लंबाई 31 फीट (लगभग 9.45 मीटर) तक होती थी, जो कि एक स्कूल बस के बराबर है। अपनी विशालता और ताकत के कारण इसे डायनासोर-किलर कहा जाता था, क्योंकि यह उस समय के विशालकाय डायनासोरों का भी शिकार करने में सक्षम था।

जॉर्जिया के कार्टरविले स्थित टेलस साइंस म्यूजियम में अब इस दैत्य की आदमकद प्रतिकृति प्रदर्शित की गई है। म्यूजियम की क्यूरेटोरियल समन्वयक रेबेका मेल्सहाइमर का कहना है कि शब्दों या चित्रों में इस जीव की विशालता को समझाना कठिन है, लेकिन जब लोग इसे सामने देखते हैं, तो इसकी भयावहता का अहसास होता है।

इस खोज और पुनर्निर्माण के पीछे डॉ. डेविड श्लीमर का 40 वर्षों का कठिन परिश्रम है। उन्होंने अलबामा, जॉर्जिया और टेक्सास के विभिन्न जीवाश्म स्थलों की खाक छानी। उनके इस योगदान को देखते हुए 2020 में वैज्ञानिकों ने आधिकारिक तौर पर इस प्रजाति का नाम डेइनोसुचस श्लीमर रखा। डॉ. श्लीमर ने बताया कि इन प्रतिकृतियों को बनाने के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले 3 डी स्कैन का उपयोग किया गया है ताकि इसकी हड्डियों और खाल की बनावट को सटीक रूप से दर्शाया जा सके।

डॉ. श्लीमर का जुड़ाव इस जीव से बचपन में ही हो गया था जब उन्होंने न्यूयॉर्क के अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री में इसका एक विशाल सिर देखा था। आज उनके शोध न केवल संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रहे हैं, बल्कि छात्रों के लिए शोध के नए द्वार भी खोल रहे हैं। यह प्रदर्शनी न केवल एक प्राचीन शिकारी की झलक देती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे प्रकृति के इन एपेक्स प्रीडेटर्स ने बदलते परिवेश में खुद को ढाला और वर्चस्व कायम किया। टेलस साइंस म्यूजियम वर्तमान में दुनिया का एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ इस विशिष्ट प्रजाति का कास्ट मौजूद है।

#Paleontology, #Deinosuchus, #PrehistoricWorld, #DinosaurHunter, #ScienceNews #जीवाश्मविज्ञान, #प्रागैतिहासिक, #डायनासोर, #विज्ञान, #अनोखीदुनिया