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यूरोपीय देशों को हथियारों की आपूर्ति में देरी

ईरान के मुद्दे पर खुलकर साथ नहीं देने के बाद का असर

एजेंसियां

वाशिंगटनः अमेरिकी अधिकारियों ने अपने यूरोपीय समकक्षों को सूचित किया है कि ईरान के साथ जारी युद्ध के कारण हथियारों के भंडार में कमी आई है, जिससे पहले से अनुबंधित कुछ हथियारों की आपूर्ति में देरी होने की संभावना है। इस मामले से परिचित सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस देरी से बाल्टिक क्षेत्र और स्कैंडिनेवियाई देशों सहित कई यूरोपीय देश प्रभावित होंगे।

यूरोपीय देशों द्वारा खरीदे गए ये हथियार फॉरेन मिलिट्री सेल्स कार्यक्रम के तहत अनुबंधित थे, लेकिन अभी तक उनकी डिलीवरी नहीं हुई है। अमेरिकी अधिकारियों ने हाल के दिनों में द्विपक्षीय संदेशों के माध्यम से यूरोपीय देशों को इन संभावित देरी के बारे में सचेत किया है। व्हाइट हाउस और विदेश विभाग ने इस संबंध में पूछे गए सवालों को पेंटागन की ओर निर्देशित कर दिया, जिसने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है।

यह देरी इस बात को रेखांकित करती है कि 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल हवाई हमलों के साथ शुरू हुए ईरान युद्ध ने अमेरिकी हथियारों और गोला-बारूद के भंडार पर कितना दबाव डाल दिया है। ईरान ने युद्ध की शुरुआत से ही खाड़ी देशों पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं।

इनमें से अधिकांश को पीएसी-3 पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर द्वारा रोका गया है—यह वही तकनीक है जिस पर यूक्रेन अपनी ऊर्जा और सैन्य बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए निर्भर है। यूरोपीय अधिकारी इस देरी से नाराज हैं और उनका कहना है कि इससे वे एक कठिन स्थिति में आ गए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में वाशिंगटन ने यूरोपीय नाटो भागीदारों पर अधिक अमेरिकी हथियार खरीदने का दबाव डाला था ताकि यूरोप की रक्षा का भार स्वयं यूरोपीय देशों पर स्थानांतरित किया जा सके।

अब आपूर्ति में देरी के कारण यूरोपीय राजधानियों में निराशा बढ़ रही है, और कई देश अब यूरोप में ही निर्मित हथियार प्रणालियों की ओर देख रहे हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि मध्य पूर्व में युद्ध के लिए इन हथियारों की तत्काल आवश्यकता है।

उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने में अमेरिका और इजरायल की मदद न करने के लिए यूरोपीय देशों की आलोचना भी की है। उल्लेखनीय है कि 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण और 2023 के अंत में गाजा में सैन्य अभियानों के बाद से ही अमेरिका अपने अरबों डॉलर के हथियारों के भंडार का उपयोग कर चुका है, जिससे अब आपूर्ति श्रृंखला और अधिक प्रभावित हो रही है।