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इबोला के अंतिम मरीज को अस्पताल से छुट्टी

अफ्रीकी देश युगांडा से एक बेहतर खबर जारी की गयी

एजेंसियां

कंपालाः युगांडा में इबोला वायरस से संक्रमित और उपचाराधीन अंतिम मरीज को पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इस मरीज के डिस्चार्ज होने के साथ ही देश में अब इस जानलेवा बीमारी का कोई भी सक्रिय पुष्ट मामला नहीं बचा है। इस राहत भरे अवसर पर आयोजित एक विशेष समारोह में देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. क्रिस बारियोमुन्सी ने इसे अत्यंत खुशी का क्षण करार दिया। युगांडा में इस वर्तमान प्रकोप के पहले मामले की पुष्टि मई में की गई थी, जब एक संक्रमित व्यक्ति पड़ोसी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो से बेहतर इलाज के लिए सीमा पार कर युगांडा आया था।

कांगो वर्तमान में इस महामारी का मुख्य केंद्र बना हुआ है, जहां अब तक लगभग 800 लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस ने चेतावनी दी है कि यह प्रकोप इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप बन चुका है और यह कांगो में खतरनाक रफ्तार से पैर पसार रहा है। उन्होंने सचेत किया कि संक्रमण का यह प्रसार पिछले किसी भी रिकॉर्ड की तुलना में कहीं अधिक तीव्र है और कांगो में सामने आ रहे नए मामलों में से लगभग 80% मरीजों के संक्रमण की कड़ियों का स्वास्थ्य अधिकारियों को पहले से कोई सुराग नहीं था।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कांगो में अब तक 2,000 से अधिक पुष्ट संक्रमण और 796 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि दो महीने पहले प्रकोप की आधिकारिक घोषणा होने से पहले ही यह वायरस कई महीनों तक समुदायों में गुप्त रूप से फैल रहा था। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने जिनेवा मुख्यालय में बताया कि लगभग दो-तिहाई मौतें अस्पतालों के बाहर, सीधे स्थानीय समुदायों के भीतर हो रही हैं, यानी ऐसे लोगों में जो कभी किसी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंच ही नहीं पाए। इससे पहले, एक डब्ल्यूएचओ अधिकारी ने यह भी अंदेशा जताया था कि संक्रमण का वास्तविक आंकड़ा दर्ज किए गए आंकड़ों से चार गुना तक अधिक हो सकता है।