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चीनी बांध से बढ़ते खतरे को भांप चुका है भारत

सीमा पर शुरू कर दिया जवाबी एक्शन

  • ईंट का जवाब पत्थर से देंगे

  • क्षेत्र में रणनीति तैयारी तेज हुई

  • ब्रह्मपुत्र के डैम पर दुनिया में सवाल

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: चीन वैश्विक स्तर पर अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहा है। हालाँकि, इस मेगा डैम की सुरक्षा को लेकर खुद चीनी सरकारी संस्था चाइना जियोलॉजिकल सर्वे की निगरानी में किए गए एक शोध ने गंभीर खतरे की घंटी बजा दी है।

चीनी वैज्ञानिकों के इस अध्ययन के अनुसार, जिस क्षेत्र में यह बांध बनाया जा रहा है, वहाँ जमीन के नीचे पाइझेन फॉल्ट नामक अत्यधिक सक्रिय फॉल्ट लाइन मौजूद है। यह इलाका हिमालय के सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है, जहाँ की चट्टानें प्राकृतिक रूप से कमजोर हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि भविष्य में यहाँ आने वाले किसी भी बड़े भूकंप से भीषण भूस्खलन हो सकता है, जिससे बांध, सुरंग, सड़कों और पुलों जैसी संरचनाओं को भारी नुकसान पहुँच सकता है।

यह परियोजना भारत की सीमा के बेहद करीब स्थित है। ब्रह्मपुत्र नदी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और बांग्लादेश के करोड़ों लोगों की आजीविका, पर्यावरण तथा जल सुरक्षा का मुख्य आधार है। भारत लंबे समय से यह आशंका जताता रहा है कि चीन इन बांधों के जरिए जल प्रवाह को नियंत्रित कर सकता है या इसे रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। अब चीनी रिपोर्ट द्वारा सुरक्षा खामियों की पुष्टि होने से यह खतरा और बढ़ गया है कि किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में पूर्वोत्तर भारत में भारी तबाही आ सकती है।

इस भू-राजनीतिक और पर्यावरणीय चुनौती का सामना करने के लिए भारत ने अपनी रणनीतिक तैयारियों को तेज कर दिया है। इसके तहत भारत ने अरुणाचल प्रदेश के सियांग और शि-योमी जिलों में सियोम नदी पर 1000 मेगावाट की नायिंग हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को पर्यावरणीय मंजूरी दे दी है। लगभग 11,835 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का विकास नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन द्वारा किया जाएगा। भारत के इस कदम को चीन की हरकतों के जवाब में सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की एक ठोस रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। चीनी वैज्ञानिकों की इस रिपोर्ट ने बांध की सुरक्षा के चीनी दावों को खारिज करते हुए इस मुद्दे पर एक नई अंतरराष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।