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ईरान की नाकेबंदी से उत्पन्न ऊर्जा संकट से निपटने की तैयारी

नेपाल में अब पांच दिन का कार्य सप्ताह

एजेंसियां

काठमांडुः नेपाल ने ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण उपजे गहरे ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सरकारी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में कार्य सप्ताह को छह दिनों से घटाकर पांच दिन करने की घोषणा की है। रविवार को हुई एक आपातकालीन कैबिनेट बैठक में सरकार ने शनिवार और रविवार, दोनों दिन साप्ताहिक अवकाश रखने का निर्णय लिया।

सरकारी प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने संवाददाताओं को बताया, सरकारी कार्यालय और शैक्षणिक संस्थान अब सप्ताह में दो दिन—शनिवार और रविवार—बंद रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईंधन आपूर्ति की वर्तमान असहज स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था। इस हिमालयी राष्ट्र में पहले केवल शनिवार को ही सिविल सेवकों के लिए अवकाश होता था, लेकिन अब सरकारी कार्यालय सोमवार से शुक्रवार तक सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होंगे।

पोखरेल ने यह भी साझा किया कि सरकार पेट्रोल और डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक पावर में बदलने के लिए कानूनी उपायों पर विचार कर रही है, हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी। 3 करोड़ की आबादी वाला नेपाल एक स्थल-रुद्ध देश है, जिसके पास तेल के कुएं या जीवाश्म ईंधन के अन्य स्रोत नहीं हैं। यह अपनी ईंधन आपूर्ति के लिए लगभग पूरी तरह से भारत पर निर्भर है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली कीमतों की उथल-पुथल का सीधा असर नेपाल पर पड़ता है।

गुरुवार को नेपाल ने विमानन ईंधन की कीमतों को लगभग दोगुना कर दिया था। सरकारी स्वामित्व वाली नेपाल ऑयल कॉर्प का कहना है कि कीमतों में कुछ वृद्धि के बावजूद अन्य पेट्रोलियम उत्पादों पर भारी घाटा हो रहा है। अधिकारियों ने जनता से ईंधन के उपयोग में कटौती करने का आग्रह किया है। पिछले महीने से ही होर्डिंग और दहशत में की जाने वाली खरीदारी को रोकने के लिए खाना पकाने के गैस सिलेंडर आधे भरकर बेचे जा रहे हैं।

ईंधन संकट ने नेपाल की पर्यटन-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए एक नया खतरा पैदा कर दिया है। विमानन ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का किराया बढ़ गया है, जिससे यात्री प्रभावित हो रहे हैं। मध्य पूर्व में तनाव तब से बढ़ गया है जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया था। जवाब में तेहरान ने इजरायल, जॉर्डन, इराक और खाड़ी देशों को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं, जिससे वैश्विक बाजारों और विमानन सेवाओं में भारी व्यवधान पैदा हुआ है।